

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई और नतीजों ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए। चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी ने 294 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 215 से घटकर 80 सीटों पर सिमट गई।
इस चुनाव में महिलाओं को साधने के लिए दोनों पार्टियों ने आक्रामक रणनीति अपनाई। ममता बनर्जी की सरकार ने ‘लक्ष्मी भंडार’ समेत कई योजनाओं के जरिए महिला वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश की। योजना के तहत महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही थी, जिसे चुनाव से पहले बढ़ाया भी गया।
वहीं बीजेपी ने ‘अन्नपूर्णा भंडार’ का बड़ा वादा करते हुए महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये देने की घोषणा की। इसके साथ ही मुफ्त बस यात्रा, सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण और सुरक्षा को लेकर कई बड़े वादे किए गए।
महिलाओं की सुरक्षा भी बड़ा चुनावी मुद्दा रही। संदेशखाली और आरजी कर अस्पताल जैसी घटनाओं को लेकर बीजेपी ने सरकार पर हमला बोला और ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ जैसी पहल का ऐलान किया।
गरीब महिलाओं और युवतियों के लिए आर्थिक मदद, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े वादों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, महिला वोट में झुकाव और कल्याणकारी वादों की रणनीति ने बीजेपी को बड़ी बढ़त दिलाई।





















