अमेरिका और इजरायल के संबंध केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी गहराई से दिखाई देता है। लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि यदि कोई अमेरिकी नेता इजरायल की नीतियों की खुलकर आलोचना करता है या उस पर दबाव बनाने की बात करता है, तो उसे राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस विषय को अमेरिकी राजनीति का 'पॉलिटिकल ब्लैक होल' तक बताते हैं।

क्या है 'पॉलिटिकल ब्लैक होल' का मतलब?

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल इजरायल का मुद्दा किसी नेता की चुनावी हार का कारण बन जाता है। बल्कि, इजरायल से जुड़े मामलों पर अपनाया गया रुख कई बार नेताओं के लिए अतिरिक्त राजनीतिक दबाव और जटिलताएं पैदा कर देता है। इसलिए अधिकांश अमेरिकी नेता इस विषय पर बेहद संतुलित और सावधानीपूर्ण बयान देते हैं।

चार्ल्स पर्सी का मामला अक्सर दिया जाता है उदाहरण

इस संदर्भ में पूर्व अमेरिकी सीनेटर चार्ल्स पर्सी का नाम अक्सर लिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया था कि अमेरिका इजरायल को बिना शर्त बड़ी मात्रा में आर्थिक और सैन्य सहायता क्यों देता है। साथ ही उन्होंने फिलिस्तीनी मुद्दे पर अधिक संतुलित नीति अपनाने की बात कही थी। इसके बाद उनके खिलाफ व्यापक राजनीतिक अभियान चला और बाद में वे चुनाव हार गए। वॉशिंगटन की राजनीतिक चर्चाओं में आज भी इस घटना का उल्लेख एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में किया जाता है।

जिमी कार्टर की आलोचनाएं भी रहीं चर्चा में

पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने मिस्र और इजरायल के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उन्होंने इजरायल की कुछ नीतियों की सार्वजनिक आलोचना की, जिससे कई प्रभावशाली समूहों के साथ उनके संबंधों में दूरी आने की चर्चा होती रही।

ओबामा और नेतन्याहू के बीच भी दिखा था टकराव

बराक ओबामा के कार्यकाल में भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए। ओबामा ईरान के साथ परमाणु समझौते को आगे बढ़ा रहे थे, जबकि तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इसका लगातार विरोध कर रहे थे। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नेतन्याहू ने अमेरिकी कांग्रेस में जाकर ओबामा प्रशासन की नीति की सार्वजनिक आलोचना की।

राजनीतिक फंडिंग और लॉबिंग की अहम भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में चुनावी अभियान बेहद खर्चीले होते हैं। ऐसे में चुनावी फंडिंग, लॉबिंग समूहों और राजनीतिक एक्शन कमेटियों (PACs) की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई प्रो-इजरायल संगठन चुनावी अभियानों में सक्रिय रहते हैं, जिसके कारण अधिकांश अमेरिकी नेता इजरायल से जुड़े मुद्दों पर बयान देते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतते हैं।

आज भी संवेदनशील बना हुआ है यह मुद्दा

हाल के समय में डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान से जुड़े मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। इसके बावजूद राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिकी राजनीति में इजरायल आज भी एक बेहद संवेदनशील विषय बना हुआ है और इस पर किसी भी नेता का रुख उसकी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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