

बलरामपुर/राजपुर(अभिषेक कुमार सोनी)। बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र स्थित भिलाई इलाके में संचालित एक गिट्टी क्रेशर प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे में आदिवासी मजदूर की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासनिक व्यवस्था, श्रम कानूनों के पालन और अवैध खनन-परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार सिंघल क्रेशर में रविवार दोपहर करीब 2 बजे से 2:30 बजे के बीच क्रेशर के झरना की सफाई कराई जा रही थी। इसी दौरान वहां लगा करीब डेढ़ क्विंटल वजनी लोहे का कीप अचानक टूटकर मजदूर के ऊपर गिर पड़ा। हादसे में मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि घायल को निकालने में करीब एक घंटे का समय लगा। इसके बाद उसे स्कॉर्पियो वाहन से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शी मजदूरों ने लगाए कई गंभीर आरोप
घटना के प्रत्यक्षदर्शी मजदूर अर्पण एक्का और जीवन खाखा ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 2 बजे से 2:30 बजे के बीच क्रेशर प्लांट की सफाई का कार्य कराया जा रहा था। इसी दौरान अचानक “सोल” टूट गया, जिससे अनमोल केनवर उसके नीचे दब गया।अर्पण के अनुसार, घायल को बाहर निकालने में लगभग एक घंटे का समय लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। जेसीबी की मदद से प्लांट को पलटकर अनमोल को बाहर निकाला गया, जिसके बाद उसे स्कॉर्पियो वाहन से अस्पताल ले जाया गया।
मजदूर जीवन ने आरोप लगाया कि अस्पताल ले जाते समय कर्मचारियों से कहा गया कि वे यह न बताएं कि अनमोल केनवर के नीचे दबा था, बल्कि केवल यह कहें कि उसे जेसीबी के बकेट से चोट लगी है।उन्होंने बताया कि घायल को करीब शाम 4 बजे अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद क्रेशर प्रबंधन की ओर से फोन कर यह कहा जा रहा था कि “वहां कैमरा लगा है, सबको निकलवा देना।”उन्होंने आरोप लगाया कि क्रेशर में काम करने वाले मजदूरों को सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के उपकरण या सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।
नाबालिग मजदूरों से काम कराने के आरोप
घटना के बाद क्षेत्र में संचालित क्रेशर प्लांटों में नाबालिग मजदूरों से काम कराए जाने का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई क्रेशर संचालक नियमों को दरकिनार कर नाबालिगों से मजदूरी करा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।बताया जा रहा है कि हादसा सिंघल क्रेशर में हुआ, जो पहले विजय सिंघल के नाम से संचालित था। बाद में यह क्रेशर क्रेशर संघ के जिला अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल को बेच दिया गया था। वर्तमान में मुकेश अग्रवाल अन्य तीन-चार साझेदारों के साथ मिलकर इसका संचालन कर रहे थे।
नियमों को तक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड गिट्टी वाहन
क्रेशर हादसे के बाद इलाके में अवैध गिट्टी परिवहन और ओवरलोड वाहनों का मुद्दा भी गर्म हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-रात सैकड़ों ओवरलोड गिट्टी वाहन गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय आंख मूंदे बैठे हैं।सम्बंधित विभाग की कथित मिलीभगत से बिना जीएसटी बिल और पिटपास के ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। ये वाहन सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश और झारखंड तक गिट्टी पहुंचा रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं जर्जर सड़कों और दुर्घटनाओं की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।नियमों के अनुसार गिट्टी का परिवहन वैध ट्रांजिट पास और बिल के साथ ही किया जा सकता है, लेकिन क्षेत्र में दर्जनों वाहन बिना आवश्यक दस्तावेजों के खुलेआम दौड़ रहे हैं। परिवहन और माइनिंग विभाग समय-समय पर कुछ वाहनों पर कार्रवाई कर औपचारिकता निभा लेते हैं, लेकिन बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिले में केवल 31 क्रेशर संचालकों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत संचालन की अनुमति प्राप्त है, जबकि जिले में 100 से अधिक क्रेशर संचालित होने की बात सामने आ रही है। अधिकांश संचालकों के पास डायवर्शन, लीज, पिटपास और पर्यावरणीय स्वीकृति जैसे आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं। कई क्रेशर कागजों में बंद बताए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका संचालन जारी है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर पुलिस जांच में जुटी हुई है। वहीं श्रम विभाग, खनिज विभाग, परिवहन विभाग और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। बरियों पुलिस कुछ भी जानकारी देने से बचती नजर आ रही है।





















