लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद चीनी उद्योग में व्यापक सुधार हुए हैं। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने गन्ना भुगतान, मिलों के आधुनिकीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे कई अहम कदम उठाए, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

3.16 लाख करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान, खत्म हुआ बकाया संकट
पहले जहां गन्ना किसानों का हजारों करोड़ रुपये बकाया रहता था, वहीं अब पिछले 9 वर्षों में 3.16 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इससे किसानों को समय पर उनकी मेहनत का मूल्य मिल रहा है और खेती के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत हुआ है।

पेराई क्षमता में बड़ा इजाफा, उत्पादन ने बनाया रिकॉर्ड
सरकार ने चीनी मिलों की पेराई क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन 8.47 लाख टन तक पहुंचा दिया है। इसके चलते पिछले 9 वर्षों में 9,156 लाख टन गन्ने की पेराई की गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे किसानों का गन्ना समय पर मिलों तक पहुंच रहा है और खराब होने की समस्या भी कम हुई है।

बंद मिलों को फिर मिली रफ्तार, 44 से ज्यादा का हुआ आधुनिकीकरण
वर्षों से बंद पड़ी रमाला, मुंडेरवा और पिपराइच जैसी चीनी मिलों को फिर से शुरू कराया गया है। इसके अलावा 44 से अधिक मिलों का आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार किया गया, जिससे पूरे सिस्टम को नई गति मिली है।

45 जिलों में 122 मिलें, 10 लाख लोगों को रोजगार
राज्य के 45 जिलों में फैली 122 चीनी मिलों ने रोजगार के बड़े अवसर पैदा किए हैं। करीब 10 लाख लोगों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है, जिसमें विभिन्न कौशल स्तर के युवा शामिल हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट, बाजार में बढ़ा कैश फ्लो
समय पर भुगतान होने से ग्रामीण बाजारों में हर पेराई सत्र में 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हो रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और स्थानीय व्यापार भी तेजी से बढ़ा है।

किसानों से युवाओं तक, हर वर्ग को मिला फायदा
इन सुधारों ने न केवल गन्ना किसानों की स्थिति मजबूत की है, बल्कि युवाओं के लिए भी नए रोजगार के रास्ते खोले हैं। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश का चीनी उद्योग अब राज्य के विकास का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है।

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