

बलरामपुर: जिले में सर्पदंश से होने वाली मृत्यु एवं गंभीर जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सर्पदंश रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संगवारी संस्थान के सहयोग से स्वास्थ्यकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।प्रशिक्षण में डीएनबी फैमिली मेडिसिन एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षक डॉ. चैतन्य मलिक ने स्वास्थकर्मियों को सर्पदंश की पहचान, प्राथमिक उपचार, एंटी स्नेक वेनम के वैज्ञानिक एवं सही उपयोग, विषैले एवं अविषैले सर्पों की पहचान तथा रैपिड प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी उपचार की प्रक्रिया के बारे में भी बताया।
प्रशिक्षण में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने कहा कि सर्पदंश जिले के लिए एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य चुनौती है और प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों के द्वारा सर्पदंश पीड़ितों को समय पर गुणवत्तापूर्ण एवं वैज्ञानिक उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एंटी स्नेक वेनम एवं उचित उपचार से अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक अथवा घरेलू उपचार के बजाय पीड़ित को तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने के लिए समुदाय में जागरूकता बढ़ाने को कहा। साथ ही जंगल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों को सर्पदंश से बचाव के उपायों एवं बरती जाने वाली सावधानियों के बोर में लोगों को जागरूक करने को कहा।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से आए स्टाफ नर्स, चिकित्सा अधिकारियों एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी शामिल हुए।











