

आपात स्थिति में गंभीर मरीजों की जान बचाना था पहली प्राथमिकता
जीवन रक्षक उपचार में देरी न हो इसलिए निर्णय लेकर मरीजों को एक साथ किया गया रेफर
घटना के दौरान दो 108 एम्बुलेंस रही सक्रिय
बलरामपुर/अंबिकापुर। विभिन्न माध्यमों में प्रसारित समाचार, तीन मरीजों को एक ही एम्बुलेंस से रेफर किए जाने का उल्लेख किया गया है, जिसके संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तथ्यात्मक जानकारी दी है कि 15 जुलाई 2026 को शाम लगभग 6ः30 बजे ग्राम जारगिम में एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया। दुर्घटना के समय वाहन में लगभग 12 मजदूर सवार थे। जिसमें दो मजदूरों की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, जबकि शेष घायलों में चार की स्थिति अत्यंत गंभीर थी।
घटना की सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस के माध्यम से गंभीर घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, शंकरगढ़ लाया गया। अन्य सात घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, मनोहरपुर में प्राथमिक उपचार दिया जा रहा था। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें भी सीएचसी शंकरगढ़ लाना आवश्यक हुआ, जिसके लिए उपलब्ध 108 एम्बुलेंस को मनोहरपुर भेजा गया।इसी दौरान सीएचसी शंकरगढ़ में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत और गंभीर होने लगी तथा उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थान मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर रेफर करना आवश्यक हो गया। चूंकि शंकरगढ़ ब्लॉक में एकमात्र 108 एम्बुलेंस अन्य घायलों को लाने के लिए मनोहरपुर गई हुई थी, इसलिए दूसरे ब्लॉक से 108 एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि दुर्घटना के समय सभी गंभीर मरीजों को तत्काल उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराना सर्वाेच्च प्राथमिकता थी। अतिरिक्त एम्बुलेंस की प्रतीक्षा करने पर मरीजों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता था। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सकों ने मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए, आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी, पर्याप्त व्यवस्था एवं परिजनों की उपस्थिति में तीन गंभीर मरीजों को एक ही एम्बुलेंस से सुरक्षित रूप से मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर रेफर किया।
उन्होंने बताया कि घटना के दौरान कुल दो 108 एम्बुलेंस सक्रिय रूप से संचालित की गईं। एक एम्बुलेंस मनोहरपुर से घायलों को सीएचसी शंकरगढ़ लाने में लगी थी, जबकि दूसरे ब्लॉक से उपलब्ध कराई गई, दूसरी एम्बुलेंस में गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर भेजा गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जानकारी दी कि तीन मरीजों को एक ही एम्बुलेंस से रेफर करने का निर्णय पूरी तरह आपातकालीन परिस्थितियों, मरीजों की गंभीर स्थिति तथा समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया था। जहां सभी मरीजों को सुरक्षित रूप से मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया।
जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई
कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद दर्ज कराई गई एफआईआर
अम्बिकापुर। कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला सरगुजा द्वारा समाचार पत्र में प्रकाशित "बिना जांच रिपोर्ट एफआईआर, कर्मचारी 100 दिन जेल में बिताने को हुआ मजबूर" शीर्षक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है। विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित खबर तथ्यहीन, निराधार एवं उपलब्ध अभिलेखों के विपरीत हैं तथा विभागीय कार्रवाई नियमानुसार की गई है।
विभाग द्वारा दिए गए जानकारी के अनुसार संबंधित प्रकरण में लगभग 1 करोड़ 7 लाख रुपये के कथित गबन की जांच उपसंचालक स्तर पर गठित जांच समिति द्वारा की गई थी। जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक स्थित विभागीय खाते के बैंक स्टेटमेंट, सीजीटीसी से प्राप्त रसीदों एवं अन्य अभिलेखों का मिलान कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया। जांच में संबंधित राशि बैंक खाते में जमा नहीं होना प्रमाणित पाए जाने पर 25 सितम्बर 2025 को जांच प्रतिवेदन पुलिस थाना कोतवाली, अम्बिकापुर को उपलब्ध कराया गया। इसके बाद 10 जनवरी 2026 का अतिरिक्त जांच प्रतिवेदन भी पुलिस को सौंपा गया, जो न्यायालय में प्रस्तुत चालान के साथ संलग्न है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि समाचार पत्र में जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होने तथा बिना जांच के एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर पूरी तरह निराधार है। विभाग के अनुसार दोनों जांच प्रतिवेदन पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं तथा न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों का हिस्सा हैं।
विभाग द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया है कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन सहायक ग्रेड-2 श्री प्रदीप कुमार अंबष्ट को 12 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के माध्यम से उनसे बैंक खाते में जमा नहीं हुई राशि का स्पष्टीकरण एवं अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, किंतु उनके द्वारा कोई संतोषजनक एवं समाधानकारक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके उपरांत नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
विभाग के अनुसार संबंधित कर्मचारी से प्रभार लिए जाने के बाद पुनः विस्तृत जांच कराई गई, जिसमें सीजीटीसी से प्राप्त 1 करोड़ 89 लाख 4 हजार 831 रुपये की राशि बैंक खाते में जमा होना नहीं पाया गया। पशु रोगी कल्याण समिति की 63 लाख 29 हजार 640 रुपये एवं 37 लाख 27 हजार 853 रुपये कुल 2 करोड़ 98 लाख 14 हजार 544 रुपये के संबंध में भी संबंधित कर्मचारी द्वारा कोई संतोषजनक लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया। इन सभी तथ्यों एवं दस्तावेजों को पुलिस जांच के दौरान उपलब्ध कराया गया है तथा वे न्यायालय में प्रस्तुत चालान का हिस्सा हैं।
विभाग ने समाचार में प्रकाशित ’’दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए’’ ’’चालान पेश होने पर जांच की पोल खुली’’ तथा "जांच समिति का गठन नहीं हुआ’’ खबर निराधार हैं। विभाग के अनुसार जांच समिति का विधिवत गठन किया गया था तथा जांच से संबंधित समस्त दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। विभाग का कहना है कि प्रकाशित समाचार में इन तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे आमजन के समक्ष भ्रामक स्थिति उत्पन्न हुई।
कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, सरगुजा ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि संबंधित प्रकरण वर्तमान में माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय, सरगुजा में विचाराधीन है। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण का ट्रायल जारी है।











