
सूरजपुर: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिलफिली में विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार और विद्यालय में ताला लगाए जाने की शिकायत की जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने भृत्य पायल सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के उल्लंघन के प्रथमदृष्टया दोष के आधार पर की गई है।
कार्यालयीन आदेश के मुताबिक, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सूरजपुर द्वारा 10 सितंबर 2026 को प्राचार्य शासकीय उ.मा.वि. सिलफिली के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। शिकायत में विद्यालय के विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार किए जाने और विद्यालय में ताला जड़ने का आरोप शामिल था।जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि 11 अगस्त 2026 की घटना के दौरान पायल सिंह के पति एवं अन्य बाहरी व्यक्ति विद्यालय परिसर में मौजूद थे। उनके विद्यालय पहुंचने के बाद स्थिति और अधिक गंभीर होने की बात जांच में सामने आई।जांच समिति ने उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के बाद प्रथमदृष्टया माना कि घटना में पायल सिंह की भूमिका अन्य संबंधित व्यक्तियों की तुलना में अधिक सक्रिय और महत्वपूर्ण रही। आदेश में कहा गया है कि उनके आचरण से शासकीय कर्तव्यों और संस्था के अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप से विद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण पर भी गंभीर असर पड़ा।जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में पायल सिंह के कृत्य को शासकीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं कदाचरण बताते हुए इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत माना गया है।इसके आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत पायल सिंह को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से निलंबित कर दिया गया है।निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या बिहारपुर, विकासखंड ओड़गी, जिला सूरजपुर निर्धारित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
यह कार्रवाई 13 सितंबर 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन और उसमें सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।





















