
नई दिल्ली: भारत में मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल आज आम हो गया है। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर डिजिटल पेमेंट और मनोरंजन तक, इंटरनेट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन एक दशक पहले तक मोबाइल डेटा और कॉलिंग पर लोगों को काफी खर्च करना पड़ता था। साल 2016 में रिलायंस जियो की एंट्री ने टेलीकॉम बाजार की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। मुफ्त वॉयस कॉलिंग और कम कीमत वाले डेटा प्लान के साथ कंपनी ने तेजी से करोड़ों ग्राहकों को अपने नेटवर्क से जोड़ा। अब जियो की शुरुआती सफलता और संभावित आईपीओ को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज है।
मुफ्त कॉलिंग और सस्ते डेटा से बदला बाजार
रिलायंस जियो ने सितंबर 2016 में अपनी व्यावसायिक सेवाओं की शुरुआत की। कंपनी ने शुरुआती दौर में मुफ्त वॉयस कॉलिंग और आकर्षक डेटा ऑफर पेश किए। इससे मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा और टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई।
जियो की एंट्री के बाद दूसरी कंपनियों को भी अपने टैरिफ प्लान और सेवाओं में बदलाव करना पड़ा। कम कीमत पर इंटरनेट उपलब्ध होने से वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल पहले के मुकाबले आसान हुआ। इस बदलाव ने देश में मोबाइल इंटरनेट के विस्तार को नई गति दी।
महज 170 दिनों में 10 करोड़ ग्राहक
जियो की शुरुआती सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी ने लगभग 170 दिनों में 10 करोड़ ग्राहकों का आंकड़ा पार कर लिया था। इतनी कम अवधि में बड़ी संख्या में ग्राहकों को जोड़ना भारतीय टेलीकॉम बाजार की उल्लेखनीय घटनाओं में शामिल रहा।कम कीमत वाले डेटा प्लान ने उन लोगों के लिए भी इंटरनेट का रास्ता खोला, जो पहले महंगे रिचार्ज के कारण इसका सीमित इस्तेमाल करते थे। बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोबाइल इंटरनेट की मांग बढ़ने लगी।
दूरदराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी का विस्तार
मोबाइल नेटवर्क का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और डिजिटल सेवाओं का लाभ लेने के नए अवसर मिले।
मोबाइल कनेक्टिविटी ने परिवारों के बीच संपर्क बनाए रखने के साथ ऑनलाइन लेनदेन और सरकारी डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को भी आसान बनाया। हालांकि, देश के सभी क्षेत्रों में नेटवर्क की गुणवत्ता और उपलब्धता एक जैसी नहीं है, इसलिए कनेक्टिविटी के विस्तार की चुनौती अब भी बनी हुई है।
कोरोना काल में इंटरनेट की अहमियत बढ़ी
साल 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान इंटरनेट की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई। स्कूलों और कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई, कई कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम अपनाया और डॉक्टरों से परामर्श के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ा।इस दौर में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं ने लोगों को घरों में रहते हुए पढ़ाई, कामकाज और परिवार से संपर्क बनाए रखने में मदद की। जियो समेत अन्य दूरसंचार कंपनियों की सेवाएं इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बनीं।
अब IPO को लेकर क्यों है दिलचस्पी?
जियो की शुरुआत सस्ती कॉलिंग और डेटा से हुई थी, लेकिन अब डिजिटल कनेक्टिविटी और इंटरनेट आधारित सेवाओं का बाजार काफी व्यापक हो चुका है। ऐसे में कंपनी के संभावित आईपीओ को लेकर निवेशकों और बाजार के जानकारों की दिलचस्पी बनी हुई है।आईपीओ के जरिए किसी कंपनी के शेयर पहली बार सार्वजनिक रूप से निवेशकों के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। यदि जियो का आईपीओ आता है, तो निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, आईपीओ की तारीख, शेयर की कीमत और अन्य विवरणों के लिए कंपनी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।
टेलीकॉम बाजार में जियो की अहम भूमिका
रिलायंस जियो की यात्रा दिखाती है कि कम कीमत वाले डेटा प्लान, बड़े स्तर पर नेटवर्क विस्तार और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र को किस तरह प्रभावित किया। 170 दिनों में 10 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने से लेकर आईपीओ की संभावनाओं तक, कंपनी की कहानी भारतीय डिजिटल बाजार में आए बदलावों को समझने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।




















