New Delhi: An IndiGo aircraft stands parked on the runway at the Indira Gandhi International Airport as several IndiGo flights continue to be cancelled or delayed in New Delhi on Saturday, December 6, 2025. (Photo: IANS/Deepak Kumar)

भारत के घरेलू विमानन क्षेत्र में अक्टूबर के दौरान सुधार के संकेत मिल रहे हैं। त्योहारी सीजन में यात्रा की मांग बढ़ने और एयरलाइंस की ओर से उड़ानों की क्षमता बहाल किए जाने से घरेलू हवाई यात्री ट्रैफिक में सालाना आधार पर गिरावट घटकर 4-5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक इक्विटी रिसर्च रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू हवाई यात्री ट्रैफिक में लगातार चार महीनों तक गिरावट दर्ज होने के बाद अक्टूबर में स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में घरेलू प्रस्थान करने वाले यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि अक्टूबर में अब तक यह गिरावट घटकर अनुमानित 4-5 प्रतिशत रह गई है। महीने-दर-महीने आधार पर भी यात्री ट्रैफिक में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

जेफरीज ने कहा कि एयरलाइंस की ओर से उड़ानों की कुछ क्षमता बहाल करने और त्योहारी सीजन में यात्रा की मांग बढ़ने से यात्री ट्रैफिक को समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में पिछले साल के रुझान का भी उल्लेख किया गया है। कैलेंडर वर्ष 2025 में जुलाई से सितंबर के दौरान गिरावट के बाद अक्टूबर-नवंबर में यात्री ट्रैफिक की सालाना वृद्धि दर सकारात्मक हो गई थी। हालांकि, इंडिगो के शेड्यूलिंग संकट के बीच दिसंबर में यातायात फिर कमजोर पड़ गया था।

इंडिगो और एयर इंडिया के यात्री ट्रैफिक में गिरावट

घरेलू विमानन बाजार में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान कमजोरी बनी रही। इस अवधि में एयरलाइंस की ओर से उड़ानों की क्षमता घटाए जाने के बीच यात्री ट्रैफिक में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सितंबर में इंडिगो के घरेलू यात्री ट्रैफिक में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की कमी आई, जबकि एयर इंडिया का यात्री ट्रैफिक 9 प्रतिशत गिर गया। भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्री ट्रैफिक पर भी दबाव बना रहा और सितंबर में इसमें 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें बनीं चुनौती

यात्री ट्रैफिक में सुधार के संकेतों के बावजूद एयरलाइंस के लिए लागत का दबाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी विमानन कंपनियों की परिचालन लागत को प्रभावित कर सकती है।

जेफरीज के मुताबिक, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक जेट फ्यूल की स्पॉट कीमतें जुलाई-सितंबर तिमाही के औसत स्तर से 17 प्रतिशत ऊपर पहुंच गई हैं। ब्रोकरेज ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतें एयरलाइंस के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन की ऊंची लागत और विमानों का कम उपयोग एयरलाइंस की लाभप्रदता पर दबाव डाल सकते हैं, भले ही प्रति यात्री मिलने वाले किराये से होने वाली आय में सुधार हो। इंडिगो के मामले में ईंधन महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण उड़ानों की क्षमता और टिकटों की कीमतों से जुड़े फैसले लेना अधिक जटिल हो सकता है।

जेफरीज ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहने पर एयरलाइंस की कमाई पर दबाव बना रह सकता है। विमानन क्षेत्र में टिकाऊ सुधार के लिए भू-राजनीतिक तनाव में कमी आना भी महत्वपूर्ण होगा।

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