दशकों से एक ही विकासखंड में पदस्थ सचिवों के कार्यकाल एवं स्थानांतरण प्रक्रिया पदस्थापना एवं स्थानांतरण की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग

कथित वसूली, सोशल मीडिया पर निजी वीडियो वायरल और फोन कॉल प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग

बलरामपुर/राजपुर। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने जनपद पंचायत राजपुर क्षेत्र से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों को लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, सरगुजा संभाग आयुक्त, कलेक्टर बलरामपुर तथा जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर के नाम एसडीएम राजपुर को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। संस्था ने एक ओर ग्राम पंचायतों से विज्ञापन के नाम पर कथित राशि वसूली, पत्रकार की छवि धूमिल करने के प्रयास और संभावित साइबर अपराध की जांच कराने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत राजपुर में लंबे समय से पदस्थ पंचायत सचिवों के कार्यकाल एवं स्थानांतरण मामलों की भी जांच की मांग उठाई है।

संस्था के सचिव उमेश सिंह द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जनपद पंचायत राजपुर क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों से सचिव संघ के कुछ पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा पत्रकारों के नाम पर विज्ञापन प्रकाशित कराने के लिए प्रति पंचायत लगभग पांच हजार रुपये की राशि वसूले जाने की जानकारी सामने आई है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में एक समाचार पोर्टल में खबर भी प्रकाशित हुई थी, जिसमें कथित रूप से वसूली के हिसाब-किताब से संबंधित दस्तावेज पत्रकार को उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया था।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि उक्त समाचार प्रकाशित होने के बाद संबंधित पत्रकार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कुछ कथित पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर वर्ष 2022 का एक पुराना निजी वीडियो वायरल किया गया। संस्था ने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए संभावित साइबर अपराध की श्रेणी में माना है तथा इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इसके अलावा संस्था ने आरोप लगाया है कि समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार को कथित रूप से झूठे मामलों में फंसाने अथवा मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की गई। ज्ञापन के अनुसार 20 मई 2026 को एक मोबाइल नंबर से पत्रकार को फोन कर महिला सचिव और महिला शिक्षिका के माध्यम से फंसाने संबंधी बातें कही गई थीं। संस्था ने इस दूरभाष वार्ता की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

मानवाधिकार फाउंडेशन ने मांग की है कि कथित वसूली, उससे जुड़े अभिलेखों और हिसाब-किताब की सत्यता, सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारण, संभावित साइबर अपराध, निजता के उल्लंघन तथा दूरभाष वार्ता से जुड़े सभी तथ्यों की सक्षम अधिकारी अथवा मजिस्ट्रियल स्तर से जांच कराई जाए। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और आरोप सत्य पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

इसी क्रम में संस्था ने एक अलग ज्ञापन के माध्यम से जनपद पंचायत राजपुर अंतर्गत पदस्थ पंचायत सचिवों के कार्यकाल और स्थानांतरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि अनेक सचिव लंबे समय से एक ही विकासखंड क्षेत्र में कार्यरत हैं और कई मामलों में केवल ग्राम पंचायतों के बीच स्थानांतरण किया गया है, लेकिन विकासखंड से बाहर स्थानांतरण नहीं होने से प्रशासनिक निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को लेकर आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं।

संस्था ने शासन की स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए कहा है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना से प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसलिए जनपद पंचायत राजपुर में कार्यरत पंचायत सचिवों के विगत दो वर्षों के कार्यकाल, पदस्थापना एवं स्थानांतरण की जांच कर यह परीक्षण किया जाए कि शासन की नीतियों एवं नियमों का पालन हुआ है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

दोनों ज्ञापनों की प्रतिलिपि अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों एवं संवाददाताओं को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है। संस्था ने पूरे मामले में पारदर्शी जांच और न्यायोचित कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, एक पत्रकार ने राजपुर जनपद क्षेत्र में पंचायत सचिव संघ पर ग्राम पंचायतों से "मीडिया विज्ञापन" के नाम पर प्रति पंचायत लगभग ₹5 हजार की कथित वसूली किए जाने संबंधी समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद संबंधित पत्रकार ने आरोप लगाया कि उनकी सामाजिक छवि धूमिल करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 का एक निजी वीडियो राजपुर के ही दो पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर वायरल किया गया। पत्रकार का दावा है कि यह कार्रवाई कथित वसूली संबंधी समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद की गई।
मामले में साइबर अपराध, निजता के अधिकार के उल्लंघन, मानसिक प्रताड़ना तथा पत्रकार पर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में पीड़ित पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के नाम राजपुर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं पीड़ित पत्रकार का यह भी आरोप है कि एक कथित पत्रकार द्वारा उन्हें दूरभाष पर संपर्क कर पंचायत सचिवों से संबंधित लंबी बातचीत की गई। बातचीत के दौरान कथित रूप से महिला सचिवों एवं सरपंचों के माध्यम से उन्हें फंसाने जैसी बातें कही गईं। इन आरोपों के बाद कुछ पत्रकारों एवं सचिवों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

पीड़ित पत्रकार का कहना है कि वीडियो वायरल होने से लेकर शिकायत दर्ज कराने तक कुछ लोगों द्वारा लगातार फोन कर समाचार और शिकायत वापस लेने अथवा उस पर चर्चा करने का दबाव बनाया जाता रहा, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हुए हैं। उनका कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और उम्रदराज हैं, इसके बावजूद उन्हें बदनाम करने एवं दबाव में लेने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी बीच अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने मामले का संज्ञान लेते हुए कथित वसूली, वीडियो वायरल प्रकरण, संभावित साइबर अपराध, दूरभाष वार्ता तथा संबंधित परिस्थितियों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही जनपद पंचायत राजपुर में लंबे समय से एक ही विकासखंड में पदस्थ पंचायत सचिवों के कार्यकाल, पदस्थापना एवं स्थानांतरण प्रक्रिया की भी समीक्षा कराए जाने की मांग उठाई है। संस्था ने इन सभी मामलों को लेकर शासन एवं प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मजिस्ट्रियल स्तर की जांच कराने की मांग की है।

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