

बलरामपुर: राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से जिले में व्यापक टीबी एवं पोषण जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी एवं जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम त्यौहार हरेली के उपलक्ष्य में शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं।
इस अभियान के तहत नवीन शासकीय महाविद्यालय बलरामपुर में कार्यशाला आयोजित कर टीबी रोग की खोज, पहचान एवं उपचार पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एन.के. सिंह एवं प्राध्यापक डॉ. अर्चना गुप्ता ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इसके साथ ही असरफी देवी नर्सिंग कॉलेज में ’टीबी नहीं है कोई बड़ी बीमारी, खाओ पौष्टिक आहार और रहो मस्त, बस यही है इसकी कहानी’ थीम के तहत छात्र-छात्राओं को बीमारी के बचाव और पोषण के महत्व की जानकारी दी गई तथा निबंध व चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है और नियमित दवा व पौष्टिक आहार से मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो जाते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में दो सप्ताह से अधिक खांसी, सीने में दर्द, भूख व वजन में कमी, रात में हल्का बुखार या थकान जैसे लक्षण दिखें, तो वे तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर निःशुल्क जांच कराएं ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।









