

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मोहन सरकार ने 'दृष्टि' ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए अब प्रदेश की करीब 23,011 ग्राम पंचायतों की आय, खर्च और वित्तीय लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा। इस पहल का उद्देश्य पंचायतों में होने वाले खर्च की निगरानी को आसान बनाना और आम नागरिकों को भी वित्तीय जानकारी तक पहुंच देना है।
अब घर बैठे देख सकेंगे पंचायत का पूरा हिसाब
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण अपने मोबाइल फोन के जरिए यह जान सकेंगे कि उनकी पंचायत को कितना फंड मिला, किस काम पर कितनी राशि खर्च हुई और खाते में कितनी रकम शेष है। इससे पंचायतों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय मामलों में जवाबदेही भी तय होगी।
क्या है 'दृष्टि' डिजिटल प्लेटफॉर्म?
'दृष्टि' डिजिटल ऑडिट प्लेटफॉर्म का विकास पंचायती राज संचालनालय ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के तकनीकी सहयोग से किया है। इस प्लेटफॉर्म पर प्रदेश की सभी पंचायतों की वित्तीय जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगी, जिससे ऑडिट प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी हो जाएगी।
ऑडिट प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल
पहले ऑडिट अधिकारियों को रिकॉर्ड जुटाने के लिए अलग-अलग कार्यालयों और पंचायतों का दौरा करना पड़ता था। अब ऑडिटर अपने मोबाइल या कंप्यूटर से लॉग-इन कर किसी भी पंचायत की आय, व्यय, भुगतान, सरकारी योजनाओं पर हुए खर्च और अन्य वित्तीय दस्तावेज ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे बार-बार रिकॉर्ड मंगाने या मौके पर पहुंचने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी।
कैसे करेगा काम यह सिस्टम?
दृष्टि प्लेटफॉर्म पर पंचायतों से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। ऑडिटर ऑनलाइन यह जांच सकेंगे कि सरकारी फंड का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं। साथ ही भुगतान से जुड़े दस्तावेज और खर्च का पूरा विवरण भी एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
इस पहल से होंगे कई बड़े फायदे
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से ऑडिट प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित होगी। पंचायतों के वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और गड़बड़ियों की पहचान करना आसान होगा। सरकारी धन के उपयोग पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी, जबकि पंचायतों की जनता और सरकार के प्रति जवाबदेही भी पहले से अधिक मजबूत होगी। साथ ही समय और संसाधनों की बचत होने से प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी।











