मध्य प्रदेश : राजनीति में सोमवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सीएम आवास पर होने वाली बैठक और रात्रिभोज को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले चुनिंदा सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है। बैठक के एजेंडे को लेकर फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

चार घंटे की बैठक के बाद होगा रात्रिभोज

कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री पहले आमंत्रित नेताओं के साथ बैठक करेंगे। यह बैठक शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक चलने की जानकारी है। इसके बाद सीएम आवास पर रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा।बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की रूपरेखा हाल में तय हुई है। बैठक में किन विषयों पर चर्चा होगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में इस आयोजन को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

इन प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना

रात्रिभोज में प्रदेश सरकार के जनजातीय वर्ग से जुड़े कई मंत्री और भाजपा के सांसद शामिल हो सकते हैं। संभावित सूची में नागर सिंह चौहान, संपतिया उइके, निर्मला भूरिया और कमलेश शाह के नाम बताए जा रहे हैं।इसके अलावा धार की सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, बैतूल सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के भी कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इनके अलावा करीब 13 अन्य नेताओं के शामिल होने की भी चर्चा है।

आदिवासी नेतृत्व पर फोकस के तौर पर देखा जा रहा आयोजन

कार्यक्रम में आमंत्रित नेताओं की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इसे जनजातीय वर्ग के बीच संगठन और सरकार की पहुंच मजबूत करने की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, बैठक का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक संदेश को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।भाजपा के स्तर पर जनजातीय समुदाय और उसके नेतृत्व के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दिए जाने की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री का यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के दौरान नेताओं से क्षेत्रीय मुद्दों, संगठन से जुड़े विषयों और जनजातीय क्षेत्रों की प्राथमिकताओं पर चर्चा होने की संभावना है।

डिनर से ज्यादा बैठक के एजेंडे पर रहेगी नजर

राजनीतिक दृष्टि से इस आयोजन का सबसे अहम हिस्सा रात्रिभोज से पहले होने वाली चार घंटे की बैठक मानी जा रही है। इतने लंबे समय तक नेताओं के साथ संवाद और उसके बाद अनौपचारिक माहौल में डिनर को संगठनात्मक समन्वय बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।फिलहाल सरकार की ओर से बैठक के मुद्दों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए कार्यक्रम के बाद सामने आने वाले फैसलों और नेताओं की प्रतिक्रिया से ही यह पता चलेगा कि इस बैठक का असर मध्य प्रदेश की राजनीति में कितना व्यापक होगा।

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