
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और कृष्णापुर-खानपुर रसूलाबाद में पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने कथा सुनी और संतों से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। यह धार्मिक कार्यक्रम पवन पांडेय के पैतृक आवास पर आयोजित किया गया था।
राम मंदिर नहीं गए अखिलेश यादव
अखिलेश यादव के इस दौरे के कार्यक्रम में राम मंदिर या हनुमानगढ़ी जाने का कार्यक्रम शामिल नहीं था। वह सीधे भागवत कथा स्थल पहुंचे और कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लखनऊ रवाना हुए। इस वजह से उनका अयोध्या दौरा धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में रहा।
अयोध्या से योगी को चुनाव लड़ने की चुनौती
कथा कार्यक्रम के बाद सभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार सर्वे करा रही है और दावा किया कि पार्टी को अयोध्या से उम्मीदवार नहीं मिल रहा है।
अखिलेश ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अयोध्या के विकास और अपनी सरकार के काम को लेकर इतने आश्वस्त हैं तो उन्हें खुद अयोध्या से चुनाव मैदान में उतरकर दिखाना चाहिए। यह बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या की बढ़ती राजनीतिक अहमियत के बीच आया है।
पवन पांडेय को अयोध्या से प्रत्याशी बना चुकी है सपा
समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या सीट से पवन पांडेय को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। अखिलेश यादव का ताजा दौरा ऐसे समय हुआ है, जब अयोध्या में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो रही हैं।
भागवत कथा को बताया मन और मनोबल बढ़ाने वाला माध्यम
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है और यहां हरि भक्तों का एक साथ जुटना इस स्थान की खूबसूरती को दिखाता है। उन्होंने कहा कि लोग बचपन से रामायण और महाभारत सुनते आए हैं और उनके लिए भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों ही आराध्य हैं।
उन्होंने भागवत कथा को मन और मनोबल बढ़ाने वाली बताते हुए प्रेम, दया और अपनापन को सबसे बड़ा धर्म बताया। अखिलेश ने कहा कि सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन प्रेम और संविधान कायम रहना जरूरी है।
जाति और भेदभाव के बंधनों का भी उठाया मुद्दा
सपा प्रमुख ने अपने संबोधन में सामाजिक बंधनों का जिक्र करते हुए अहंकार, सत्ता, जाति, भेदभाव, वैमनस्य और ऊंच-नीच जैसी प्रवृत्तियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में इन बंधनों से मुक्ति और भाईचारे को मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में प्रेम की भावना कमजोर होने पर उसका परिणाम कंस जैसी प्रवृत्तियों के रूप में सामने आता है। उनके भाषण का केंद्र प्रेम, सामाजिक सौहार्द और संविधान की रक्षा रहा।
अयोध्या में विकास और भेदभाव रहित शासन का वादा
अखिलेश यादव ने अयोध्या की जनता से कहा कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो शहर के विकास को गति दी जाएगी और सरकार में किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने अपने भाषण में भाजपा पर निशाना साधते हुए जनता से इस बार राजनीतिक फैसले के जरिए जवाब देने की अपील भी की।




















