
सूरजपुर: दीपावली का पर्व आते ही मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ जाती है। इन दीयों में केवल मिट्टी की सुगंध और रोशनी ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कुम्हारों की पारंपरिक कला, मेहनत और उनकी आजीविका भी समाहित होती है। ऐसे ही पारंपरिक हुनर को संजोकर रखने वाले सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंगोटी निवासी मंगल प्रजापति आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं।
पेशे से कुम्हार मंगल प्रजापति मिट्टी से दीये, बर्तन और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार कर अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं। पहले वे हाथ से चलने वाले चाक पर बर्तन बनाते थे। इस कार्य में काफी शारीरिक मेहनत लगती थी और उत्पादन भी सीमित रहता था। ऐसे में मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती थी।छत्तीसगढ़ शासन की योजना के अंतर्गत बिजली से चलने वाला चाक मिलने के बाद उनके पारंपरिक व्यवसाय को नई गति मिली। अब कम समय और कम मेहनत में अधिक बर्तनों का निर्माण कर पा रहे हैं। तकनीक के इस सहयोग ने उनके हुनर को विस्तार देने के साथ आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है। आज श्री प्रजापति ने सूरजपुर जिला मुख्यालय में अपनी दुकान स्थापित कर ली है, जहां वे नियमित रूप से मिट्टी के बर्तनों की बिक्री कर रहे हैं।
वे बताते हैं कि व्यवसाय में वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अब बच्चों की शिक्षा और परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रहे हैं। उनका एक बेटा महाविद्यालय में अध्ययनरत है, दूसरा बेटा भी अब दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए इच्छुक है। आर्थिक स्थिति बेहतर होने से वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के सपनों को भी साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मंगल प्रजापति भावुक होकर कहते हैं कि बिजली से चलने वाला चाक मिलने से उनके पारंपरिक व्यवसाय को नया सहारा मिला है। अब उनका काम पहले से बेहतर हो गया है और परिवार भी खुशहाल है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।










