
रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों की आमदनी बढ़ाने और धान पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर रही है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ सीजन में धान की जगह निर्धारित दूसरी फसल उगाने वाले पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देने का प्रावधान है। इस पहल के जरिए किसानों को दलहन, तिलहन, मक्का और कोदो-कुटकी व रागी जैसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने अधिकारियों को योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए है। बुधवार, 28 अक्टूबर को रायपुर संभाग की कृषि योजनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने फसल विविधीकरण की धीमी रफ्तार पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती को बाजार की जरूरतों से जोड़ना और पारंपरिक फसल चक्र से आगे बढ़ना जरूरी है।
धान छोड़कर दूसरी फसल अपनाने पर 15 हजार रुपये की सहायता
कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ सीजन में धान के बदले निर्धारित वैकल्पिक फसल की खेती करने वाले पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये देने का प्रावधान है। इसमें दलहन, तिलहन, मक्का और मिलेट्स जैसी फसलें शामिल है।इस योजना का उद्देश्य किसानों के लिए आय के नए रास्ते तैयार करना और खेती में फसलों की विविधता बढ़ाना है। हालांकि, सहायता राशि का लाभ निर्धारित फसल, पात्र कृषि क्षेत्र और योजना की शर्तों के आधार पर मिलेगा।
पहले से दूसरी फसल उगाने वालों के लिए भी सहायता
खरीफ 2026 के लिए उपलब्ध योजना संबंधी विवरणों के मुताबिक, दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी चिन्हित फसलों की पहले से खेती कर रहे पात्र किसानों के लिए प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।धान की जगह दूसरी फसल अपनाने वाले किसानों के लिए 15 हजार रुपये और पहले से चिन्हित वैकल्पिक फसलों की खेती करने वालों के लिए 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता अलग-अलग श्रेणियों के तहत है। किसानों को अपने जिले में लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्रता की जानकारी लेनी चाहिए।
खेती को बाजार की मांग से जोड़ने पर जोर
रायपुर संभाग की समीक्षा बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। खेती की योजना बाजार में उपलब्ध मांग को ध्यान में रखकर तैयार करनी होगी।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को फसल चयन, आधुनिक कृषि तकनीक, प्रसंस्करण और उत्पादों के विपणन में सहायता दी जाए। इससे किसान ऐसी फसलें चुन सकेंगे, जिनकी बिक्री की बेहतर संभावनाएं हों।
हर जिले में तैयार होंगे दो से तीन विशेष कृषि मॉडल
कृषि उत्पादन आयुक्त ने संभाग के प्रत्येक जिले में दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए है। इन मॉडलों का चयन स्थानीय मिट्टी, जलवायु, सिंचाई सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।कृषि विज्ञान केंद्रों और संबंधित विभागों की मदद से इन मॉडलों को विकसित किया जाएगा, ताकि किसान अपनी परिस्थितियों के अनुरूप खेती के नए विकल्प अपना सकें। दलहन, तिलहन और मिलेट्स के अलावा फल, फूल, मखाना तथा अन्य उपयुक्त उद्यानिकी फसलों की खेती बढ़ाने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पंजीयन की अंतिम तारीख और पात्रता की जानकारी लें किसान
बालोद जिले में जारी सूचना के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत पंजीयन की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 बताई गई है। किसान नजदीकी सेवा सहकारी समिति के माध्यम से एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन करा सकते है। पात्र किसानों को सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेजने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी व्यवस्था का प्रावधान है।हालांकि, पंजीयन की तारीख और जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित जिले के कृषि विभाग या सेवा सहकारी समिति से करना जरूरी है, क्योंकि प्रक्रिया और समयसीमा स्थानीय दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू हो सकती है।
फसल विविधीकरण की धीमी रफ्तार पर अधिकारियों को निर्देश
समीक्षा बैठक में फसल विविधीकरण की प्रगति उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलने पर कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों से ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने दलहन, तिलहन और मिलेट्स का रकबा बढ़ाने के साथ योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया।कृषि विभाग को किसानों के बीच पात्रता, आर्थिक सहायता, बाजार की उपलब्धता और आधुनिक खेती के तरीकों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। सरकार की कोशिश है कि किसान धान के साथ दूसरी लाभकारी फसलों को भी अपनाएं और अपनी आमदनी के विकल्प बढ़ा सकें।


















