
नई दिल्ली: पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उप निर्वाचन आयुक्तों के नेतृत्व में संबंधित राज्यों का दौरा कर चुनावी तैयारियों का जायजा लेना शुरू कर दिया है। फिलहाल आयोग की एक टीम उत्तराखंड के दौरे पर है। आने वाले दिनों में अधिकारी मणिपुर और पंजाब का दौरा करेंगे, जबकि गोवा के दौरे की तारीखों में बदलाव किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के दौरे को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटों पर चुनाव होना है। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है। वहीं, मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर पूरा होगा। मणिपुर में 60, गोवा में 40, पंजाब में 117 और उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटें हैं।
चुनाव कार्यक्रम से पहले होगा राज्यों का दौरा
आमतौर पर विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों वाली पूर्ण आयोग की टीम संबंधित राज्यों का दौरा करती है। इस दौरान चुनावी तैयारियों, प्रशासनिक व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जाती है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत निर्वाचन आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले भी चुनाव कराने की अनुमति है। ऐसे में आगामी चुनावों को लेकर आयोग की तैयारियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
यूपी और गोवा में ईवीएम-वीवीपैट की जांच शुरू
चुनावी तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश और गोवा में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) तथा वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीनों की प्रथम स्तर की जांच (एफएलसी) शुरू कर दी गई है। यह प्रक्रिया मतदान में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की तकनीकी स्थिति और कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।
इस जांच के दौरान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के इंजीनियर मशीनों की तकनीकी खामियों की पड़ताल करते हैं। ये दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का निर्माण करती हैं। जांच में खराब पाई जाने वाली मशीनों को मरम्मत या बदलने के लिए संबंधित निर्माता कंपनियों के पास भेजा जाता है।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में होगी जांच
एफएलसी के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक पोल भी कराया जाता है। इसके जरिए मशीनों के सही तरीके से काम करने की पुष्टि की जाती है। निर्वाचन आयोग इसके लिए निर्धारित कैलेंडर जारी करता है, जिसका संबंधित राज्यों को पालन करना होता है।
जांच प्रक्रिया के दौरान ईवीएम की कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट में पिछले चुनावों से जुड़ा डेटा पूरी तरह मिटा दिया जाता है। सभी परीक्षणों में सफल होने वाली मशीनों पर ‘एफएलसी ओके’ का निशान लगाया जाता है। इसके बाद अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए उन्हें विशेष गुलाबी कागजी सील से सील किया जाता है।
एक ईवीएम प्रणाली में कम से कम एक बैलेट यूनिट, एक कंट्रोल यूनिट और एक वीवीपैट मशीन शामिल होती है। चुनाव से पहले इन मशीनों की जांच को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारु मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।




















