

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने श्रद्धालुओं को तीर्थ स्थलों की गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आजकल कई लोग तीर्थों को केवल घूमने या मनोरंजन का स्थान समझने लगे हैं, जबकि इनका वास्तविक उद्देश्य आत्मिक शांति, साधना और ईश्वर के प्रति आस्था को मजबूत करना है।
धार्मिक स्थलों की मर्यादा का रखें सम्मान
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि तीर्थों की पहचान उनकी पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण से होती है। यदि वहां अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का पालन नहीं किया जाएगा तो उनकी दिव्यता धीरे धीरे प्रभावित होने लगेगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि तीर्थ यात्रा के दौरान स्वच्छता, अनुशासन और सदाचार को प्राथमिकता दें तथा ऐसा कोई कार्य न करें जिससे धार्मिक स्थलों की गरिमा को ठेस पहुंचे।
श्रद्धालुओं की भी है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि तीर्थों की पवित्रता बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु का भी कर्तव्य है। जब लोग श्रद्धा, अच्छे आचरण और स्वच्छता के साथ तीर्थ यात्रा करेंगे, तभी इन स्थानों का आध्यात्मिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान भविष्य में भी सुरक्षित रह सकेगी।
श्रीमद्भागवत कथा में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रविवार को आयोजित कथा में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी पत्नी कौशल्या साय के साथ शामिल हुए। उन्होंने कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर से आशीर्वाद प्राप्त किया और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया।
प्रदेशवासियों के सुख और समृद्धि की कामना
मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में बताया कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा से छत्तीसगढ़ के सभी लोगों के सुख, समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद्भागवत कथा लोगों को सत्य, करुणा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ मन को भी शांति प्रदान करते हैं।











