

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में अधिकारियों के बीच समन्वय और प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि रायगढ़ जिले में जिला शिक्षा अधिकारी ने संयुक्त संचालक के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शिक्षकों की पदस्थापना नहीं की, जिससे मामला लगातार उलझता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वरिष्ठ शिक्षकों की आपत्ति के बाद पहुंचा मामला जेडी तक
जानकारी के अनुसार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़ विकासखंड में पदस्थ चार शिक्षक जयंत कुमार राठिया, गनपत सिदार, रामदीन सिदार और मोहिंदर सिंह मरावी ने स्थान चयन प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के बावजूद उनसे जूनियर शिक्षकों को पहले स्थान चयन का अवसर दे दिया गया।
शिक्षकों ने पहले जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति रखी, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने संभागीय स्तर पर गठित समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया।
जेडी ने माना शिक्षकों का दावा, दोबारा काउंसलिंग के दिए निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद संयुक्त संचालक ने शिक्षकों के अभ्यावेदन को स्वीकार करते हुए आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि संबंधित शिक्षक अतिशेष श्रेणी में जरूर हैं, लेकिन स्थानांतरण और पदस्थापना प्रक्रिया में त्रुटि हुई है। इसलिए दोबारा काउंसलिंग कर उन्हें उनके ही विकासखंड में नियमानुसार पदस्थ किया जाए, क्योंकि उनसे कनिष्ठ शिक्षकों को पहले ही वहां पदस्थ किया जा चुका है।
निर्देश के बाद भी नहीं हुई पदस्थापना
आरोप है कि संयुक्त संचालक के स्पष्ट आदेश के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी ने पदस्थापना आदेश जारी नहीं किया। इसके बजाय पूरे मामले को फिर से संयुक्त संचालक के पास मार्गदर्शन और पुनर्विचार के लिए भेज दिया।
बताया जा रहा है कि दूसरी बार भी संयुक्त संचालक ने अपने पहले आदेश का हवाला देते हुए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद संबंधित शिक्षकों को अब तक नई पदस्थापना नहीं मिली। फिलहाल वे विकासखंड स्तर पर आमद दर्ज कर रहे हैं और अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
एकल शिक्षक वाले स्कूलों में भी नहीं भेजे जा रहे शिक्षक
सबसे अहम बात यह है कि सारंगढ़ विकासखंड में कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही है। इनमें नवापारा, भेंजनार, लालाधुर्वा, बनहर और टांगर जैसे स्कूल शामिल बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, लालाधुर्वा में पदस्थ एक शिक्षक छात्रावास अधीक्षक के रूप में अन्यत्र संलग्न हैं, जबकि बनहर के एक शिक्षक संकुल समन्वयक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में दोनों स्कूल प्रभावी रूप से एकल शिक्षक व्यवस्था में संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से यहां अतिरिक्त शिक्षकों की मांग कर रहे हैं।
विभागीय कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
संयुक्त संचालक के दो-दो आदेश जारी होने के बावजूद पदस्थापना नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह मामला केवल चार शिक्षकों की पदस्थापना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक आदेशों के पालन और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग इस पूरे मामले में आगे क्या निर्णय लेता है।





















