अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के अंबिकापुर स्थित बौरीपारा विदेशी कंपोजिट शराब दुकान में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बेचने का मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। आबकारी आयुक्त ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित क्षेत्र के आबकारी उप निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही जिला आबकारी अधिकारी और सहायक जिला आबकारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

छद्म ग्राहक बनकर हुई जांच, खुली ओवररेटिंग की पोल

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने बौरीपारा स्थित शराब दुकान का आकस्मिक निरीक्षण किया। जांच के दौरान एक छद्म ग्राहक के माध्यम से शराब की बिक्री का सत्यापन कराया गया।

जांच में पाया गया कि दुकान में कार्यरत विक्रेता नरेन्द्र कुमार यादव ने गोल्डन गोवा व्हिस्की के 20 पाव की बिक्री निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर की। शासन द्वारा तय कीमत 120 रुपये प्रति पाव के हिसाब से कुल राशि 2400 रुपये बनती थी, लेकिन ग्राहक से 2500 रुपये वसूल किए गए। इस तरह 100 रुपये अतिरिक्त वसूले जाने की पुष्टि हुई।

विक्रेता पर दर्ज हुआ प्रकरण

जांच में अनियमितता सामने आने के बाद विक्रेता नरेन्द्र कुमार यादव के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत अधिक मूल्य पर शराब बेचने का मामला दर्ज किया गया। विभाग ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना है।

लापरवाही के आरोप में उप निरीक्षक निलंबित

आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित शराब दुकान आबकारी उप निरीक्षक अनिल गुप्ता के कार्यक्षेत्र में आती है। ऐसे में उनके अधिकार क्षेत्र में इस तरह की गंभीर अनियमितता सामने आना उनके कर्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता और कमजोर प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाता है।

इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमों के तहत अनिल गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता कार्यालय, सरगुजा निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

दो वरिष्ठ अधिकारियों से भी मांगा गया जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी विभाग ने सरगुजा के जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मीकांत गायकवाड और सहायक जिला आबकारी अधिकारी शीला बड़ा को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

दोनों अधिकारियों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

ओवररेटिंग पर विभाग ने दिखाई सख्ती

इस कार्रवाई को आबकारी विभाग का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि सरकारी निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। विभाग का कहना है कि शराब बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

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