असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को राज्य के कुछ जिलों में आधार नामांकन के आंकड़ों को लेकर चिंता जताते हुए दावा किया कि वहां जारी किए गए आधार कार्डों की संख्या अनुमानित आबादी से अधिक हो गई है। उन्होंने इसे सीमावर्ती राज्य के लिए “बड़ी जनसांख्यिकीय साजिश” का संकेत बताया।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि असम के कुछ जिलों में आधार सैचुरेशन (नामांकन कवरेज) 100 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जिसका अर्थ है कि वहां अनुमानित जनसंख्या से ज्यादा आधार कार्ड जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने लिखा, “असम के कुछ जिलों में आधार नामांकन कुल आबादी से आगे निकल गया है, जो हमारे जैसे सीमावर्ती राज्य में एक बड़ी जनसांख्यिकीय साजिश की आशंका पैदा करता है।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने अयोग्य व्यक्तियों को आधार कार्ड मिलने से रोकने के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए आधार जारी करने पर विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति आधार प्राप्त न कर सके, हमने 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए आधार जारी करने की प्रक्रिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।”

मुख्यमंत्री ने एक ग्राफिक भी साझा किया, जिसमें कुछ जिलों में आधार सैचुरेशन 100 प्रतिशत से अधिक होने को “रेड फ्लैग” बताया गया। उनके अनुसार इसका सीधा मतलब है कि उन जिलों में अनुमानित आबादी से ज्यादा आधार नंबर जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब असम सरकार पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को और सख्त बनाने तथा विशेष रूप से बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में सत्यापन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

राज्य सरकार लंबे समय से अवैध घुसपैठ और सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंता जताती रही है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सरकारी दस्तावेजों और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आधार नामांकन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए, ताकि केवल पात्र निवासियों को ही यह पहचान पत्र जारी हो सके। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद असम में जनसंख्या आंकड़ों, आधार नामांकन के पैटर्न और पहचान सत्यापन व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है, खासकर उन जिलों में जहां आधार नामांकन कथित तौर पर अनुमानित आबादी के आंकड़े से अधिक हो चुका है।

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