
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में हुए बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड मामले में स्पेशल कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप समेत तीन दोषियों को फांसी की सजा दी है। वहीं, मामले के चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।मृत्युदंड पाने वाले आरोपियों में कुलदीप, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह चौधरी शामिल हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना।
इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने 29 सितंबर को चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया था। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत में सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई, जिसके बाद तीन आरोपियों को फांसी और एक आरोपी को मरते दम तक कारावास की सजा सुनाई गई।
सूरजपुर में हुए इस हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई स्पेशल कोर्ट में की गई। लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने चारों दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान कर दिया है।अदालत के इस फैसले के बाद मामले में तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा मिली है।
जानिए क्या है पूरा मामला
घटना से कुछ दिन पहले 9 अक्टूबर 2024 की रात शहनाज अख्तर का जगराता कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसी दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का नवापारा के कुछ युवकों से विवाद हो गया। इसके दो दिन बाद पुलिस ने संदीप को हिरासत में लिया।
आरोप है कि थाने में उसके साथ मारपीट की गई। बताया गया कि संदीप के खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इस घटना के बाद कुलदीप साहू पुलिस और उन लोगों से नाराज हो गया, जिन्हें वह अपने भाई के साथ हुए विवाद और कथित मारपीट के लिए जिम्मेदार मानता था।
13 अक्टूबर की रात बढ़ा तनाव
13 अक्टूबर 2024 की शाम कुलदीप साहू अपने साथियों आर्यन विश्वकर्मा, चंद्रकांत चौधरी और रिंकू सिंह के साथ पुराने बस स्टैंड के पास बैठा था। इसी दौरान आरक्षक घनश्याम सोनवानी की नजर कुलदीप पर पड़ी। कुलदीप के जिला बदर होने के कारण पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की।पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान कुलदीप ने आरक्षक पर खौलता हुआ तेल डाल दिया। इसके बाद तलवार से हमला करने की धमकी देते हुए वह वहां से भाग निकला।इसी बीच पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर हेड कॉन्स्टेबल समेत अन्य पुलिसकर्मी कुलदीप की तलाश में जुट गए। आरोप है कि पकड़ने की कोशिश के दौरान कुलदीप ने पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने का प्रयास किया और हेड कॉन्स्टेबल को तलवार से काटने की धमकी भी दी।
घर तक पहुंचा आरोपी, फिर हुई खौफनाक वारदात
पुलिस कार्रवाई से नाराज कुलदीप कथित तौर पर हेड कॉन्स्टेबल के घर तक पहुंच गया। आरोप है कि घर में उसने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद चाकू से उसकी हत्या कर दी।इसके बाद आरोपी ने उसकी बेटी को भी निशाना बनाया। धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई। वारदात के बाद दोनों के शवों को घर से करीब 5 किलोमीटर दूर ले जाकर फेंक दिया गया।
ड्यूटी से लौटे पति ने देखा खून से सना घर
हेड कॉन्स्टेबल जब ड्यूटी पूरी कर रात में घर पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। घर के अंदर फर्श और दीवारों पर खून के निशान थे, लेकिन पत्नी और बेटी वहां नहीं थीं। घर का मंजर देखकर उसने दोनों की तलाश शुरू की।रातभर तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। अगले दिन, 14 अक्टूबर 2024 को घर से करीब 5 किलोमीटर दूर दोनों के शव बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक शव नग्न अवस्था में मिले थे।इस वारदात के बाद पुलिस ने जांच तेज की और मामले में कुलदीप साहू समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई।
29 सितंबर को दोषी, अब सजा
मां-बेटी हत्याकांड की सुनवाई न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। अदालत ने 29 सितंबर को चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया।दोषी ठहराए जाने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते समय मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के व्यवहार ने भी लोगों का ध्यान खींचा। बताया गया कि वह हंसता हुआ बाहर आया और पत्रकारों की ओर स्माइली का इशारा किया।इसके बाद 8 अक्टूबर 2026 को स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप समेत तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई, जबकि चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को मरते दम तक उम्रकैद की सजा दी गई।




















