

श्योपुर : अंतर्गत आने वाले कूनो नेशनल पार्क से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां मादा चीता KGP12 के चार शावक मंगलवार सुबह मृत अवस्था में पाए गए, जिससे पूरे वन्यजीव संरक्षण तंत्र में चिंता की लहर दौड़ गई है।
जंगल में जन्मे थे नन्हे मेहमान, एक महीने भी नहीं टिक पाई जिंदगी
जानकारी के अनुसार ये चारों शावक 11 अप्रैल 2026 को कूनो के जंगल क्षेत्र में जन्मे थे और अभी केवल लगभग एक महीने के ही थे। मॉनिटरिंग टीम को सुबह करीब 6.30 बजे श्योपुर टेरिटोरियल डिवीजन के तहत मांद के पास चारों शावकों के शव मिले। शवों की स्थिति आंशिक रूप से खाए जाने जैसी बताई जा रही है, जिससे घटना और भी रहस्यमयी हो गई है।
वन विभाग ने जताई आशंका, शिकार या प्राकृतिक कारणों की जांच जारी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शावकों को आखिरी बार 11 मई की शाम तक जीवित देखा गया था। प्रारंभिक आकलन में यह आशंका जताई जा रही है कि किसी अन्य जंगली शिकारी द्वारा हमला किया गया हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
अच्छी बात यह है कि मादा चीता KGP12 सुरक्षित और स्वस्थ बताई गई है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत बड़े पैमाने पर पुनर्वास, लेकिन चुनौतियां भी सामने
मध्य प्रदेश में चल रहे प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना से चीतों को लाकर बसाने का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए राज्य के दो प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है, जिनमें कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर का गांधी सागर अभयारण्य शामिल हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीता CCV-2 और CCV-3 को खुले जंगल में छोड़ा था, जिनका क्वारंटीन पीरियड पूरा हो चुका था। मोहन यादव ने इस कदम को प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया था।
देश में 53 चीतों का कुनबा, फिर भी संरक्षण पर उठ रहे सवाल
वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में लगभग 50 चीते मौजूद हैं, जिनमें 33 भारत में जन्मे हुए हैं। वहीं गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3 चीते रखे गए हैं। इस तरह देश में चीतों की कुल संख्या 53 तक पहुंच चुकी है।
लेकिन लगातार हो रही घटनाएं और शावकों की मौतें इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रही हैं।
अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर, खुल सकता है मौत का असली राज
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और वन विभाग का पूरा फोकस पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है। इसी रिपोर्ट के बाद यह साफ हो पाएगा कि यह मौतें किसी हमले का नतीजा थीं या फिर प्राकृतिक कारणों से हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना।





















