बलरामपुर: कलेक्टर  चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के नेतृत्व में जिले में संचालित मोर गांव मोर पानी अभियान जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत शुरू की गई नवा तरिया आय के जरिया पहल जल संवर्धन, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिले में स्वीकृत नए तालाब वर्षा जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण समुदाय के लिए स्थायी जल स्रोत के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।

जिले में जल संकट की चुनौती से निपटने और वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने के उद्देश्य से विभिन्न विकासखंडों में नवीन तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है। इन तालाबों का निर्माण वैज्ञानिक पद्धति से किया जा रहा है। जल संग्रहण क्षमता को बनाए रखने के लिए इनलेट, आउटलेट एवं सिल्ट ट्रैप जैसी संरचनाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे मिट्टी का बहाव नियंत्रित होगा और तालाबों की जलधारण क्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी।

जिले में वर्तमान में कुल 12 नवा तरिया स्वीकृत किए गए हैं। इनमें विकासखंड बलरामपुर में 2, कुसमी में 2, राजपुर में 1, रामचंद्रपुर में 4, शंकरगढ़ में 1 तथा वाड्रफनगर में 2 नवा तरिया शामिल हैं। इनमें से 9 स्थानों पर निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रत्येक निर्माण स्थल पर प्रतिदिन लगभग 40 से 50 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

इन जल संरचनाओं के निर्माण से किसानों को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ मिलेगा आने वाले वर्षों में सिंचाई के रकबे में वृद्धि होने, भूजल स्तर में सुधार आने तथा पशुओं के लिए वर्षभर पेयजल उपलब्ध होने की संभावना है। जल उपलब्धता बढ़ने से किसानों को बहुफसली खेती अपनाने, सब्जी उत्पादन बढ़ाने तथा अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर भी प्राप्त होंगे।

कलेक्टर  चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संचालित मोर गांव मोर पानी अभियान जिले में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए स्थायी विकास का आधार बन रहा है। नवा तरिया आय के जरिया जैसी पहलें न केवल जल संसाधनों के संरक्षण में सहायक सिद्ध हो रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।

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