

नागपुर। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान इन दिनों सुर्खियों में है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि परिवार बड़ा हो सकता है, लेकिन उसमें से एक सदस्य को समाज और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करना चाहिए। यह बयान ऐसे मंच से आया, जहां कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक चेहरे मौजूद थे।
दिग्गज नेताओं और संतों की उपस्थिति में हुआ आयोजन
इस कार्यक्रम में मोहन भागवत, देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी जैसे प्रमुख नेता भी उपस्थित थे। बड़ी संख्या में साधु-संत और आम नागरिक भी इस आयोजन का हिस्सा बने। यह कार्यक्रम नागपुर में बन रहे भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित किया गया था।
मंदिर को बताया सांस्कृतिक प्रतीक, दिया ‘शास्त्र और शस्त्र’ का संदेश
अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत की परंपरा केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि शक्ति और सुरक्षा का भी संदेश देती है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाएगा कि देश ‘शास्त्र’ और ‘शस्त्र’ दोनों के संतुलन से चलता है। उनके अनुसार यह माला और भाला दोनों का संगम है।
संघ कार्यकर्ताओं की भूमिका का किया उल्लेख
उन्होंने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि जब कहीं संकट आता है, तो कई लोग पीछे हट जाते हैं, लेकिन स्वयंसेवी संगठन के कार्यकर्ता आगे बढ़कर लोगों की मदद करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने सेवा और समर्पण को सबसे बड़ा धर्म बताया।
बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं, चर्चा तेज
इस बयान के सामने आने के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे प्रेरणात्मक संदेश मान रहे हैं, तो कुछ इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। फिलहाल यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है।
































