नई दिल्ली। आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ाने वाली एक और खबर सामने आई है। विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में मंगलवार को 5.46 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई। इसके बाद एटीएफ का दाम 115 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यानी विमानन कंपनियों को अब हर लीटर ईंधन के लिए 6.28 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।एटीएफ की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस की परिचालन लागत पर सीधा दबाव पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में हवाई टिकट महंगे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, ईंधन महंगा होने के तुरंत बाद टिकट किराये में वृद्धि होना जरूरी नहीं है।

ईंधन के खर्च में आया सीधा उछाल

एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में विमान ईंधन की हिस्सेदारी काफी अहम होती है। विमानों के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में एटीएफ की जरूरत पड़ती है। इसलिए ईंधन के दाम में मामूली बदलाव भी कंपनियों के खर्च पर असर डाल सकता है।नई दर लागू होने के बाद एटीएफ 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है। पिछली कीमत 115 रुपये प्रति लीटर थी। इस हिसाब से प्रति लीटर 6.28 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो 5.46 फीसदी के बराबर है।

क्या अब महंगा हो जाएगा हवाई टिकट?

एटीएफ की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि एयरलाइंस तत्काल टिकट के दाम बढ़ा देंगी। हवाई किराया कई परिस्थितियों के आधार पर तय होता है। इनमें यात्रियों की मांग, सीटों की उपलब्धता, रूट, प्रतिस्पर्धा, परिचालन लागत और एयरलाइन की व्यावसायिक रणनीति शामिल हैं।अगर ईंधन की ऊंची कीमत कुछ समय तक बनी रहती है और कंपनियों की लागत लगातार बढ़ती है, तो अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा यात्रियों से वसूलने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में खासकर ज्यादा मांग वाले रूट पर टिकट महंगे हो सकते हैं।

एयरलाइंस के सामने दोहरी चुनौती

ईंधन के अलावा विमानन कंपनियों को कर्मचारियों के वेतन, विमान रखरखाव, एयरपोर्ट शुल्क, नेविगेशन चार्ज और दूसरे परिचालन खर्च भी उठाने पड़ते हैं। एटीएफ महंगा होने से इन सभी खर्चों के बीच कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।यदि कंपनियां प्रतिस्पर्धा के कारण किराया नहीं बढ़ाती हैं तो बढ़ी हुई ईंधन लागत का असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि लागत यात्रियों तक पहुंचाई जाती है तो हवाई यात्रा का बजट बढ़ सकता है।

रेल और सड़क यात्रा पर भी पड़ सकता है असर

अगर हवाई किराये में लगातार बढ़ोतरी होती है तो कुछ यात्री वैकल्पिक परिवहन साधनों का रुख कर सकते हैं। खासकर ऐसे रूट पर जहां रेल या सड़क परिवहन सुविधाजनक और कम खर्चीला विकल्प उपलब्ध है।इसका असर टिकट की मांग, एयरलाइंस की क्षमता और अलग-अलग रूट पर कंपनियों की रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है।

महंगाई के बीच एक और लागत बढ़ी

एटीएफ की कीमत में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब आम लोगों और कारोबारियों के खर्च को लेकर महंगाई का दबाव बना हुआ है। दूध और कमर्शियल एलपीजी जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में बदलाव के बाद विमान ईंधन महंगा होने से परिवहन और यात्रा लागत को लेकर भी चिंता बढ़ी है।हालांकि एटीएफ की बढ़ी कीमत का आम उपभोक्ता पर तत्काल कितना असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में एयरलाइंस की किराया नीति और प्रमुख घरेलू रूट पर टिकटों की कीमतों में बदलाव से स्थिति साफ होगी।

यात्रियों के लिए अभी क्या समझना जरूरी है?

फिलहाल सबसे अहम बदलाव एटीएफ की कीमत में हुआ है, जो 115 रुपये से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यात्रियों को यदि आने वाले दिनों में हवाई यात्रा करनी है तो टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग तारीख और एयरलाइंस के किराये की तुलना करना फायदेमंद हो सकता है।अगर ईंधन की बढ़ी लागत लंबे समय तक कायम रहती है, तो हवाई टिकट की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी। ऐसे में एयरलाइंस के अगले कदम पर यात्रियों और विमानन उद्योग दोनों की नजर रहेगी।

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