

अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)। शहर में हुए बहुचर्चित मुकेश पटाखा और प्लास्टिक दुकान अग्निकांड मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। कलेक्टर द्वारा गठित उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
23 अप्रैल की घटना से दहला था घनी आबादी वाला इलाका
23 अप्रैल को शहर के एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित पटाखा और प्लास्टिक दुकान में भीषण आग लग गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दुकान में अवैध रूप से भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया था, जिसने आग को और भयावह बना दिया।
फॉरेंसिक जांच में जुटे अहम सबूत, सैंपल भेजे गए जांच के लिए
घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। इनमें जले हुए पटाखों के रैपर, खाली खोखे और प्लास्टिक सामग्री के अवशेष शामिल हैं।इन सैंपलों की वैज्ञानिक जांच से आग लगने के वास्तविक कारणों का पता चल सकता है, जिससे पूरे मामले की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
7 दिनों में रिपोर्ट, तय होगी आगे की कार्रवाई की दिशा
उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।इस रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिससे नियमों के उल्लंघन पर बड़ा संदेश जाएगा।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग तेज
घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध पटाखा भंडारण को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से बड़े हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है।नागरिकों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
पूरे मामले में अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक हादसा नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन की गंभीर परीक्षा बन गया है।

































