

तत्कालीन निलंबित एसडीएम करुण कुमार डहरिया द्वारा पत्रकारिता पर दबाव और भय का वातावरण निर्मित करने का किया गया था प्रयास
रायपुर/बलरामपुर। पत्रकारिता की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रशासनिक पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग ने 12 जनवरी 2026 को जांच के निर्देश जारी किए हैं। पत्रकार एवं ऑल मीडिया प्रेस एसोसिएशन दिल्ली के सरगुजा संभाग अध्यक्ष अभिषेक कुमार सोनी द्वारा की गई शिकायत पर गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक को जांच के निर्देश दिए। वर्तमान में पुलिस अधीक्षक बलरामपुर स्तर पर मामले की जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार अभिषेक कुमार सोनी ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव,गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, संभागायुक्त सरगुजा तथा कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज सहित विभिन्न उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि संचार टुडे सीजीएमपी समाचार संगठन द्वारा प्रकाशित एक समाचार के बाद तत्कालीन निलंबित एसडीएम करुण कुमार डहरिया द्वारा पत्रकारिता पर दबाव बनाने और भय का वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया गया।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि संचार टुडे सीजीएमपी समाचार संगठन ने जनहित में सरकारी दस्तावेजों, प्रशासनिक आदेशों तथा सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर एक समाचार प्रकाशित किया था। समाचार में कथित रूप से राजस्व विभाग से जुड़े गंभीर आरोपों और उस पर संभागायुक्त द्वारा लिए गए संज्ञान का उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि समाचार तथ्यात्मक दस्तावेजों, प्रशासनिक पत्राचार और सार्वजनिक रिकॉर्ड पर आधारित था तथा उसमें किसी भी प्रकार की अपमानजनक भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणी अथवा दुर्भावनापूर्ण आरोप शामिल नहीं थे।
शिकायत के अनुसार समाचार प्रकाशन के बाद तत्कालीन एसडीएम करुण कुमार डहरिया द्वारा संचार टुडे सीजीएमपी न्यूज के प्रधान संपादक को एक कथित मानहानि नोटिस जारी किया गया। आरोप है कि उक्त नोटिस संबंधित पक्ष को विधिवत प्राप्त होने से पहले ही प्रशासनिक व्हाट्सएप समूहों तथा अन्य असंबंधित व्यक्तियों के बीच प्रसारित कर दिया गया। इससे प्रधान संपादक के विरुद्ध लगाए गए आरोप सार्वजनिक रूप से प्रसारित हुए और उनकी सामाजिक, व्यावसायिक तथा नैतिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नोटिस में भारी क्षतिपूर्ति की मांग कर पत्रकार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने तथा समाचार प्रकाशन को लेकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। शिकायत में इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताया गया है।
अभिषेक कुमार सोनी ने अपने आवेदन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) का उल्लेख करते हुए कहा है कि प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है तथा प्रेस की स्वतंत्रता इसी संवैधानिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। शिकायत में कहा गया है कि सरकारी आदेशों, जांच रिपोर्टों, राजस्व अभिलेखों और सार्वजनिक शिकायतों पर आधारित तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पत्रकार का वैधानिक दायित्व है तथा स्थापित विधिक सिद्धांतों के अनुसार ऐसी रिपोर्टिंग को सामान्य रूप से मानहानि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन के गृह (सामान्य) विभाग ने 12 जनवरी 2026 को पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ को पत्र जारी कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गृह विभाग ने यह भी निर्देशित किया कि जांच उपरांत की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता और विभाग दोनों को उपलब्ध कराई जाए।
गृह विभाग के निर्देश के बाद मामला पुलिस मुख्यालय से सरगुजा आईजी कार्यालय होते हुए बलरामपुर-रा.गंज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने मामले को गंभीर मानते हुए एसडीओपी कुसमी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जारी निर्देश में शिकायत में वर्णित तथ्यों की त्वरित जांच, आवश्यक कार्रवाई तथा जांच प्रतिवेदन सीएमएस पोर्टल पर अपलोड कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायत का मूल विषय पत्रकारिता के संवैधानिक अधिकारों पर दबाव, भय उत्पन्न करने की मंशा से जारी नोटिस तथा प्रशासनिक पद के संभावित दुरुपयोग से संबंधित है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते निष्पक्ष हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इससे न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता प्रभावित होगी बल्कि आम जनता तक निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है।
वर्तमान में पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी कुसमी स्तर पर मामले की जांच जारी है। अब सभी की निगाहें जांच प्रतिवेदन पर टिकी हैं, क्योंकि इसी के आधार पर आगे की प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।





















