

रायपुर : नगर निगम एक बड़े कथित घोटाले को लेकर सुर्खियों में आ गया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।
नगर निगम आयुक्त ने गठित की चार सदस्यीय जांच कमेटी, तेज हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी में नगर निवेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि हर पहलू की गहराई से जांच हो सके।
जांच कमेटी की संरचना, किन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
जांच कमेटी में पंकज शर्मा (अपर आयुक्त, नगर निवेश) को अध्यक्ष बनाया गया है। आभाष मिश्रा (नगर निवेश) को सदस्य, आशुतोष सिंह (कार्यपालन अभियंता, नगर निवेश) को सचिव और सोहन गुप्ता (उप अभियंता, नगर निवेश) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कमेटी को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
फाइलें गायब होने और प्रक्रिया बायपास करने के गंभीर आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह हैं कि नियमों को दरकिनार कर फाइलों को पास किया गया और बाद में मूल दस्तावेज गायब हो गए। 70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलों के लापता होने का दावा किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने की साजिश का आरोप, राजनीतिक बयानबाजी तेज
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे 100 करोड़ से अधिक का घोटाला बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों, दलालों और बिल्डरों की मिलीभगत से यह पूरा खेल रचा गया है और अवैध कॉलोनियों को नियमों के विपरीत वैध करने की कोशिश की गई है।
कहां-कहां जुड़ा है मामला, बोरियाखुर्द से लेकर कई कॉलोनियों तक पहुंचा विवाद
यह पूरा मामला रायपुर के वार्ड क्रमांक 54 क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर जैसे इलाके शामिल हैं। यहां 70 से अधिक खसरा नंबरों से संबंधित भूखंडों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
नियमों की अनदेखी से उठा बड़ा सवाल, कैसे बायपास हुई पूरी प्रक्रिया
नियमानुसार फाइल पहले जोन से निगम मुख्यालय, फिर आयुक्त और उसके बाद TNC विभाग जाती है। लेकिन आरोप है कि इस मामले में फाइल सीधे जोन क्रमांक 10 से TNC भेज दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया बायपास हो गई। बाद में जब फाइल आयुक्त के पास पहुंची तो उन्होंने इसे अप्रूव न होने की बात कही।
मूल नस्ती गायब, जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
जोन क्रमांक 10 से मूल फाइल गायब होने की पुष्टि भी सामने आई है, जिसके बाद संबंधित जोन आयुक्त ने आधिकारिक पत्र जारी किया है। अब पूरे मामले की सच्चाई जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
































