
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विजयादशमी का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रदेश के विभिन्न शहरों में रावण दहन के आयोजन हुए, जहां बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। राजधानी रायपुर के WRS मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। वहीं, बिलासपुर में रावण दहन के दौरान पायरो रॉकेट सेटअप में धमाका होने से अफरा-तफरी मच गई। दुर्ग में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की झांकी आकर्षण का केंद्र रही, जबकि अंबिकापुर में लेजर शो ने लोगों का ध्यान खींचा। दूसरी ओर, जगदलपुर में बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा के तहत रावण दहन नहीं किया गया।
रायपुर में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन
राजधानी रायपुर के WRS मैदान में दशहरा उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यहां 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन हुआ। कार्यक्रम देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मैदान पहुंचे। आतिशबाजी और उत्सवी माहौल के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मंच पर उपस्थित रहे।रावण दहन के साथ ही मैदान में मौजूद लोगों ने विजयादशमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया। राजधानी का यह आयोजन प्रदेश के प्रमुख दशहरा कार्यक्रमों में शामिल रहा।
बिलासपुर में रॉकेट सेटअप में धमाका, मची अफरा-तफरी
बिलासपुर में भी विजयादशमी के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर रावण दहन किया गया। रेलवे मैदान में 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन हुआ। हालांकि, पुलिस मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी से जुड़ी एक घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया।जानकारी के अनुसार, रावण दहन के लिए लगाए गए पायरो रॉकेट सेटअप में रिमोट का बटन दबाते ही मंच के पास धमाका हो गया। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी में कुछ लोगों के मामूली रूप से झुलसने की बात सामने आई। इस घटना ने सार्वजनिक आयोजनों में आतिशबाजी के दौरान सुरक्षा इंतजामों की अहमियत को फिर उजागर किया।
दुर्ग में राम, लक्ष्मण और सीता की झांकी ने मोहा मन
दुर्ग में दशहरा उत्सव के दौरान धार्मिक आस्था और परंपरा का विशेष संगम देखने को मिला। यहां कुछ लोग भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के रूप में सजी बग्गी में सवार होकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे।इस झांकी को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा। शहर में विजयादशमी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए और लोगों ने पूरे उल्लास के साथ पर्व मनाया।
जगदलपुर में क्यों नहीं होता रावण दहन?
बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में दशहरा मनाने की परंपरा प्रदेश के अन्य शहरों से अलग है। यहां सामान्य रूप से रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि बस्तर दशहरा की विशिष्ट परंपराओं का निर्वहन होता है।करीब 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा अपनी धार्मिक मान्यताओं, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यह उत्सव स्थानीय देवी-देवताओं की आराधना और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है।
अंबिकापुर में लेजर शो बना मुख्य आकर्षण
अंबिकापुर में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित दशहरा कार्यक्रम में लेजर शो ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रंग-बिरंगी रोशनी और आधुनिक तकनीक से सजी प्रस्तुतियों ने आयोजन को खास बनाया।प्रदेश के अलग-अलग शहरों में दशहरा उत्सव की प्रस्तुतियां भले ही अलग रहीं, लेकिन सभी जगह बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश प्रमुख रहा। कहीं विशाल पुतलों का दहन हुआ, तो कहीं पारंपरिक झांकियों और आधुनिक रोशनी के माध्यम से उत्सव को यादगार बनाया गया।
परंपरा और आधुनिकता के रंग में रंगा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। रायपुर का विशाल रावण दहन, दुर्ग की धार्मिक झांकी, अंबिकापुर का लेजर शो और जगदलपुर की विशिष्ट बस्तर दशहरा परंपरा इस विविधता के अलग-अलग रूप हैं। हालांकि, बिलासपुर की घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन और आतिशबाजी की उचित व्यवस्था बेहद जरूरी है।




















