बोकारो। झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में रोजगार की मांग को लेकर चल रहा विस्थापित संगठनों का विरोध प्रदर्शन रविवार को एक अहम मोड़ पर पहुंचा। विस्थापित अपरेंटिस संघ और अन्य संगठनों ने प्लांट के मुख्य द्वार पर लगाया गया जाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद कर्मचारियों और अधिकारियों की आवाजाही सामान्य हो गई। लंबे समय से जारी इस गतिरोध के कारण प्लांट आने-जाने वाले नियमित कर्मचारियों, अधिकारियों और संविदा श्रमिकों को परेशानी हो रही थी। हालांकि, मुख्य द्वार खुलने के बावजूद विस्थापित युवाओं के नियोजन का मुद्दा अब भी बना हुआ है।

मेन गेट खुलने के बाद तीनों पालियों में सामान्य हुआ आवागमन

रविवार को जाम हटने के बाद बोकारो स्टील प्लांट में कर्मचारियों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो गई। पहली पाली से ही लोगों को प्लांट में प्रवेश करने और बाहर निकलने में पहले जैसी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ा। इसके बाद दूसरी और तीसरी पाली में भी आवागमन सुचारु रहा।

मुख्य द्वार पर रास्ता बाधित होने से हजारों कर्मचारियों और संविदा श्रमिकों की ड्यूटी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। जाम समाप्त होने से औद्योगिक परिसर तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।

1500 अप्रेंटिस के नियोजन को लेकर चल रहा था आंदोलन

विस्थापित संगठनों की प्रमुख मांगों में करीब 1500 अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं को रोजगार देना शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी है।

विस्थापित परिवारों का तर्क है कि बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना के लिए उनके पूर्वजों और परिवारों ने जमीन दी थी। ऐसे में उनके पात्र युवाओं को रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसी मांग को लेकर विस्थापित अपरेंटिस संघ और दूसरे संगठन लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।

बातचीत बेनतीजा रहने के बाद बढ़ा था विरोध

नियोजन के मुद्दे पर प्रबंधन, प्रशासन और आंदोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच पहले भी बातचीत हुई थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती वार्ताओं में सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने विरोध तेज करते हुए प्लांट के प्रवेश द्वारों पर जाम लगा दिया था।

मुख्य द्वार पर अवरोध के कारण कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। शनिवार को आंदोलन का असर उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों पर भी पड़ने की जानकारी सामने आई थी। रविवार को जाम हटने के बाद आवागमन की बाधा दूर हुई, लेकिन इससे रोजगार संबंधी मांगों का समाधान नहीं हुआ है।

टू टैंक गार्डन के पास विस्थापितों का अनशन जारी

मुख्य द्वार से जाम हटने के बाद भी विस्थापितों का आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक, टू टैंक गार्डन के पास कुछ आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर अनशन जारी रखे हुए हैं।

इससे स्पष्ट है कि फिलहाल प्लांट के मुख्य द्वार पर आवागमन बहाल हुआ है, लेकिन अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं और विस्थापित युवाओं के नियोजन को लेकर अंतिम सहमति बनना बाकी है। आंदोलनकारी रोजगार के मुद्दे पर ठोस निर्णय चाहते हैं।

मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू

आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया था। चास के अनुमंडल दंडाधिकारी प्रांजल ढांढा की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163(1) के तहत मुख्य द्वार से 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश रविवार सुबह 5 बजे से प्रभावी हुआ। प्रतिबंधित क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने और हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई। प्रशासन का उद्देश्य तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करना और प्लांट की गतिविधियों को बाधित होने से बचाना था।

प्रशासनिक पहल के बाद दूर हुआ गतिरोध

बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा की पहल और प्रशासनिक स्तर पर हुई बातचीत के बाद मुख्य द्वार पर जारी गतिरोध समाप्त होने की जानकारी सामने आई है। करीब 20 घंटे तक आवागमन बाधित रहने के बाद रविवार को रास्ता खुल गया।

इससे कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिली तथा प्लांट में नियमित गतिविधियों को सामान्य करने में मदद मिली। हालांकि, उत्पादन पर आंदोलन के प्रभाव और सभी इकाइयों की कार्यस्थिति का आकलन अलग विषय है।

अब रोजगार की मांग पर फैसले का इंतजार

बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार से जाम हटने के बाद फिलहाल कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य हो गई है। लेकिन करीब 1500 अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं के नियोजन और विस्थापित परिवारों के युवाओं को रोजगार देने की मांग पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

आने वाले दिनों में प्रबंधन, जिला प्रशासन और विस्थापित संगठनों के बीच होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण होगी। स्थायी समाधान के लिए रोजगार संबंधी मांगों पर स्पष्टता, पात्रता के पारदर्शी मानदंड और सभी पक्षों के बीच सहमति अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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