
लखनपुर/ प्रिंस सोनी: स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने और घर-घर से कचरा संग्रहण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदो के आश्रित ग्राम सोयदा में इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के अनुसार, गांव में कचरा संग्रहण की व्यवस्था लंबे समय से बंद है। कचरा उठाने के लिए उपलब्ध कराए गए रिक्शे टूट-फूटकर अनुपयोगी हो चुके हैं, जबकि कचरे के पृथक्करण और सुरक्षित निस्तारण के लिए सेग्रीगेशन शेड की व्यवस्था भी नहीं है।
टूटे रिक्शों के कारण बंद पड़ा कचरा संग्रहण
गांव में स्वच्छता व्यवस्था की स्थिति ऐसी है कि कचरा संग्रहण के लिए उपलब्ध कराए गए रिक्शे अब उपयोग में नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, शुरुआती दिनों में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घर-घर जाकर कचरा एकत्रित करती थीं। लेकिन रिक्शे खराब होने के बाद यह व्यवस्था धीरे-धीरे बंद हो गई। महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से नियमित रूप से घरों से कचरा नहीं उठाया जा रहा है।
वहीं, गांव में कचरे को गीले और सूखे रूप में अलग-अलग रखने तथा उसके उचित निस्तारण के लिए सेग्रीगेशन शेड भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कचरा संग्रहण के संसाधनों की अनुपलब्धता और निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से स्वच्छता अभियान के संचालन पर सवाल उठ रहे हैं।
आम के पेड़ के नीचे जमा किया जाता था कचरा
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि जब कचरा संग्रहण का काम शुरू हुआ था, तब वे घरों से कचरा एकत्रित करती थीं। लेकिन रिक्शे खराब होने और कचरा रखने के लिए निर्धारित स्थान नहीं होने के कारण कुछ समय तक एकत्रित कचरे को एक घर के आम के पेड़ के नीचे रखा जाता था।
समूह की सदस्य फिलिसिता के अनुसार, बारिश के मौसम में वहां जमा कचरे से दुर्गंध आने लगी, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हुई। भारी बारिश के दौरान कुछ कचरा बह गया, जबकि कुछ कचरे का इस्तेमाल बच्चों ने ठंड के मौसम में आग जलाने के लिए किया। यह स्थिति गांव में कचरे के सुरक्षित संग्रहण और निस्तारण की व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
मानदेय भुगतान को लेकर महिलाओं ने उठाए सवाल
कचरा संग्रहण का काम करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मानदेय भुगतान को लेकर भी अपनी परेशानी बताई है। महिलाओं के अनुसार, मानदेय की राशि सचिव के खाते में आती है, लेकिन पिछले वर्ष और चालू वर्ष के दौरान उन्हें केवल एक-एक बार भुगतान मिलने की जानकारी है। समूह की महिलाओं का कहना है कि इस वर्ष उन्हें कुल 12 हजार रुपये ही मिले हैं।
महिलाओं ने यह भी बताया कि घरों से कचरा उठाने के दौरान कुछ ग्रामीणों के साथ विवाद की स्थिति बनती थी। इस संबंध में उन्होंने सचिव रजंति तिर्की और सरपंच को जानकारी दी थी। हालांकि, महिलाओं के मुताबिक, उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। मानदेय भुगतान की वास्तविक स्थिति और लंबित राशि के संबंध में संबंधित विभाग से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
शौचालयों की स्थिति पर भी सवाल
सोयदा में स्वच्छता व्यवस्था की समस्या केवल कचरा संग्रहण तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में कई शौचालय खराब स्थिति में हैं, जबकि कुछ शौचालयों का उपयोग शौच के बजाय घरेलू सामान रखने और अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है।स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण कराना या गांव को खुले में शौच मुक्त घोषित करना नहीं है, बल्कि इन सुविधाओं का नियमित उपयोग, रखरखाव और स्वच्छता के प्रति जागरूकता सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में शौचालयों की मरम्मत और उपयोग की स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है।
सरपंच ने टिप्पणी करने से किया इनकार, सचिव की कथित टिप्पणी भी चर्चा में
मामले में पक्ष जानने के लिए सरपंच से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, सचिव से बातचीत के दौरान कथित तौर पर पेट्रोल खर्च लेकर मामले को रफा-दफा करने की बात सामने आई। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में संबंधित पक्ष का विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
मरम्मत, सेग्रीगेशन शेड और नियमित निगरानी की जरूरत
सोयदा में कचरा संग्रहण के लिए रिक्शों की मरम्मत या नए संसाधनों की उपलब्धता, सेग्रीगेशन शेड का निर्माण और कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था तत्काल ध्यान देने योग्य मुद्दे हैं। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को नियमानुसार मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने और शौचालयों की स्थिति की समीक्षा करने की आवश्यकता है।गांव की महिलाओं को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान देंगे और कचरा संग्रहण का काम दोबारा शुरू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
अब सवाल यह है कि ग्राम पंचायत और संबंधित विभाग सोयदा की स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कब पहल करेंगे? टूटे रिक्शों की मरम्मत कब होगी, सेग्रीगेशन शेड कब बनेगा और घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था कब बहाल होगी? इन सवालों के जवाब और जमीनी स्तर पर कार्रवाई का इंतजार है।




















