
नवरात्रि शुरू होते ही मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में गरबा को लेकर एक नया सोशल मीडिया ट्रेंड चर्चा में आ गया है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर Rent A Garba Partner नाम से कई पोस्टर और विज्ञापन वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सिंगल लोग पैसे देकर कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक गरबा पार्टनर बुक कर सकते हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल इन पोस्ट और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
2 घंटे से लेकर 4 दिन तक के पैकेज का दावा
वायरल पोस्ट में अलग-अलग अवधि के लिए कई पैकेज बताए गए हैं। इनमें करीब 2 घंटे, पूरा दिन और लगातार 3 से 4 दिन तक पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।
इन पैकेज की कीमत सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार 1 हजार रुपए से शुरू होकर 6,500 रुपए तक बताई गई है। हालांकि, इन सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता और विज्ञापनों में किए गए दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
गरबा से लेकर रील बनाने तक के ऑफर
वायरल पोस्ट में पार्टनर के साथ कई तरह की गतिविधियों का जिक्र किया गया है। इनमें मुख्य रूप से:
- साथ में गरबा खेलने और डांस स्टेप सीखने का दावा
- कपल स्टाइल फोटो और सेल्फी लेने की सुविधा
- मैचिंग आउटफिट में गरबा करने का विकल्प
- इंस्टाग्राम रील और अन्य सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का ऑफर
यानी इन पोस्ट में गरबा पार्टनर को केवल डांस तक सीमित नहीं बताया गया है, बल्कि फोटो और सोशल मीडिया कंटेंट को भी पैकेज का हिस्सा बनाया गया है।
कुछ पोस्ट की भाषा ने खड़ा किया विवाद
जहां एक ओर इसे नवरात्रि के दौरान सिंगल लोगों के लिए नया सोशल ट्रेंड बताया जा रहा है, वहीं कुछ वायरल पोस्ट की भाषा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ पोस्ट में ऐसी शब्दावली और संकेत नजर आने का दावा किया जा रहा है, जिन्हें लोग आपसी नजदीकी और अतिरिक्त ऑफर से जोड़कर देख रहे हैं।
इसी वजह से सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे बदलते समय के साथ उभरता नया कमर्शियल मॉडल बता रहे हैं, जबकि दूसरे इसे नवरात्रि जैसे पारंपरिक त्योहार के व्यावसायीकरण और सामाजिक मर्यादा से जोड़कर देख रहे हैं।
वायरल पोस्ट असली या सिर्फ सोशल मीडिया का प्रयोग?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वायरल हो रहे ये विज्ञापन वास्तव में किसी संगठित सेवा का हिस्सा हैं या सिर्फ सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा एक ट्रेंड। पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए इन विज्ञापनों को देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उनकी वास्तविकता और सेवा देने वाले लोगों की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी पोस्ट को बिना सत्यापन के सच मानना जोखिम भरा हो सकता है।




















