
15 फरवरी की घटना में रामनरेश की उपचार के दौरान हुई थी मौत
बिलासपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी क्षेत्र से जुड़े बहुचर्चित बॉक्साइट वाहन विवाद और ग्रामीण रामनरेश की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपित व निलंबित तत्कालीन कुसमी एसडीएम करुण डहरिया समेत तीन आरोपियों को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की अदालत ने 17 सितंबर 2026 को तीन अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
मामले में करुण डहरिया के अलावा अन्य दो ने नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तीनों के विरुद्ध थाना कोरंधा, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में अपराध क्रमांक 03/2026 दर्ज है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत भी अपराध दर्ज किया गया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि मौजूदा स्तर पर आरोपियों को नियमित जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।
15 फरवरी की रात हंसपुर के पास हुआ था विवाद..
हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज अभियोजन के अनुसार 15 फरवरी 2026 की रात करीब 9 बजे ग्राम हंसपुर के पास बॉक्साइट से लदे एक ट्रक को स्थानीय ग्रामीणों ने रोक लिया था। वाहन को रोके जाने के बाद मौके पर विवाद की स्थिति बनी और देखते ही देखते झड़प हो गई। अभियोजन का आरोप है कि इस दौरान तत्कालीन एसडीएम कुसमी करुण डहरिया के साथ अन्य दो ने कुछ ग्रामीणों के साथ मारपीट की। घटना में कई लोग घायल हुए। घायलों में रामनरेश भी शामिल था, जिसकी उपचार के दौरान अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के कारण मौत हो गई। मामले में शुरुआत में थाना कोरंधा के थाना प्रभारी अमर सिंह कोमरे की रिपोर्ट पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच आगे बढ़ने के साथ धारा 109(1), 115, 296 और 238 तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(R), 3(1)(S) और 3(2)(v) भी जोड़ी गईं।
16 फरवरी को हुई थी गिरफ्तारी..
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक तीनों आरोपियों को 16 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश कर दिया। ट्रायल कोर्ट में कुछ अभियोजन गवाहों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं।जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे आरोपियों की ओर से यह दलील दी गई कि वे लंबे समय से जेल में हैं और जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें नियमित जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
बचाव पक्ष ने रखा अलग घटनाक्रम..
तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे ने हाईकोर्ट में दलील दी कि डहरिया को हंसपुर और धनेशपुर क्षेत्र में अवैध बॉक्साइट खनन एवं परिवहन की सूचना मिली थी। इस सूचना को उन्होंने जिला कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को भेजा था। बचाव पक्ष के अनुसार जिला कलेक्टर के निर्देश पर करुण डहरिया मौके पर पहुंचे और बॉक्साइट लदे वाहन को जब्त किया गया। इसके बाद उन्होंने दो व्यक्तियों को वाहन पुलिस थाने ले जाकर संबंधित अधिकारियों को सौंपने के लिए कहा। बचाव पक्ष का दावा था कि वाहन को थाने ले जाते समय अवैध खनन के कथित मुख्य व्यक्ति राहुल जायसवाल से जुड़े कुछ लोगों ने वाहन को रोक लिया और विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों में झड़प हुई। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि करुण डहरिया ने स्थानीय नायब तहसीलदार से संपर्क कर तत्काल बल के साथ मौके पर पहुंचने का अनुरोध किया। नायब तहसीलदार के पहुंचने के बाद करुण डहरिया भी मौके पर गए, जहां कुछ लोग गंभीर रूप से घायल मिले। इनमें रामनरेश भी था, जिसकी बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई।
कलेक्टर की जांच का भी दिया गया हवाला..
बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट के समक्ष जिला कलेक्टर द्वारा कराई गई जांच का हवाला देते हुए कहा कि उस जांच में वर्तमान आरोपियों के किसी अपराध में शामिल होने की बात सामने नहीं आई थी। यह भी दलील दी गई कि कुछ महत्वपूर्ण गवाहों ने बचाव पक्ष के समर्थन में बयान दिए हैं। बचाव पक्ष ने यह तर्क भी रखा कि आरोपियों से ऐसा कोई आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ है, जो उन्हें अपराध से जोड़ता हो। साथ ही वे 16 फरवरी से जेल में हैं, जबकि जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे के अंतिम रूप से समाप्त होने में समय लग सकता है। इन्हीं आधारों पर नियमित जमानत की मांग की गई।
आपत्तिकर्ता ने लगाया मारपीट का गंभीर आरोप..
दूसरी ओर, मामले में आपत्तिकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा एवं अधिवक्ता मोहम्मद नक़ीब ने जमानत याचिकाओं का जोरदार विरोध किया। उनकी ओर से आरोप लगाया गया कि तीनों आरोपियों ने रामनरेश के साथ हाथ और मुक्कों से मारपीट की थी, जिसके परिणामस्वरूप उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।आपत्तिकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि मृतक अनुसूचित जनजाति वर्ग से था, इसलिए मामले में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लागू होती हैं। दलील दी गई कि जमानत के स्तर पर बचाव पक्ष के गवाहों के बयानों की विस्तृत समीक्षा नहीं की जा सकती। राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ कुमार पांडे ने भी जमानत का विरोध किया। राज्य पक्ष ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दर्ज विभिन्न गवाहों के बयानों में अभियोजन के मामले का समर्थन किया गया है, हालांकि उनमें से कई गवाहों की अभी न्यायालय में गवाही नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने कहा - जमानत के स्तर पर साक्ष्यों की विस्तृत जांच नहीं..
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि कुछ घायल व्यक्तियों और पुलिसकर्मियों के बयानों में आरोपियों द्वारा रामनरेश के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट किए जाने की बात दर्ज है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट के समक्ष कुछ गवाहों ने बचाव पक्ष का समर्थन भी किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत के स्तर पर अदालत साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा नहीं कर सकती। गवाहों की विश्वसनीयता और उनके बयानों की अंतिम जांच ट्रायल के दौरान की जानी है। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के स्तर पर न्यायालय की भूमिका प्रथमदृष्टया मामले के अस्तित्व तक सीमित रहती है। मौजूदा मामले में पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोपियों पर ग्रामीणों, जिसमें रामनरेश भी शामिल था, के साथ कथित रूप से गाली-गलौज और हाथ-मुक्कों से मारपीट करने के विशिष्ट आरोप लगाए गए हैं।
कलेक्टर की रिपोर्ट पर भी हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी..
बचाव पक्ष द्वारा जिस जिला कलेक्टर की जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया, उस पर भी हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जांच में कुछ निष्कर्ष आरोपियों के पक्ष में बताए गए हैं, लेकिन उक्त रिपोर्ट आरोप पत्र का हिस्सा नहीं है। इसलिए इस स्तर पर उसकी प्रासंगिकता पर विचार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों को ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपनी निर्दोषता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध रहेगा।
तीनों आपराधिक अपीलें खारिज..
सभी तथ्यों, केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा चरण में तीनों आरोपियों को नियमित जमानत पर रिहा करना उचित मामला नहीं है। इसके साथ ही करुण डहरिया व अन्य दो की ओर से दाखिल तीनों आपराधिक अपीलों को खारिज कर दिया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाकर उसे शीघ्रता से पूरा करने की स्वतंत्रता दी है।
हाईकोर्ट के आदेश से स्पष्ट प्रमुख बिंदु..
घटना 15 फरवरी 2026 की रात ग्राम हंसपुर के पास हुई थी। विवाद की शुरुआत बॉक्साइट से लदे वाहन को ग्रामीणों द्वारा रोके जाने के बाद हुई। मामले में रामनरेश की उपचार के दौरान मौत हुई। तत्कालीन एसडीएम कुसमी करुण डहरिया व अन्य दो ने हाईकोर्ट में नियमित जमानत की मांग की थी। *तीनों की गिरफ्तारी 16 फरवरी 2026 को हुई थी।* जांच पूरी होकर आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। हाईकोर्ट ने जमानत के स्तर पर अभियोजन के प्रथमदृष्टया आरोपों को देखते हुए राहत देने से इनकार किया। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट को इस स्तर पर इसलिए नहीं माना गया क्योंकि वह आरोप पत्र का हिस्सा नहीं थी। तीनों आपराधिक अपीलें 17 सितंबर 2026 को खारिज कर दी गईं। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की कार्यवाही शीघ्रता से आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता दी है।




















