नई दिल्ली। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के अशोक विहार इलाके में झुग्गी पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों में कथित मास्टरमाइंड राजेश उर्फ काना भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, राजेश के खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हत्या के तीन मामले पहले से दर्ज हैं। तीनों आरोपियों को बुराड़ी स्थित एक होटल से पकड़ा गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेश उर्फ काना, रोहित उर्फ समोसा और नितिन के रूप में हुई है। पुलिस अब इस वारदात में शामिल अन्य आरोपी आशीष की तलाश कर रही है।

31 अगस्त की रात झुग्गी पर चली गोलियां

पुलिस के मुताबिक, 31 अगस्त को वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में देव उर्फ काके की झुग्गी को निशाना बनाकर दो राउंड फायरिंग की गई थी। आरोप है कि हमलावरों ने झुग्गी पर ईंट और बोतलें भी फेंकीं और इसके बाद मौके से फरार हो गए।शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती जांच में सामने आया कि वारदात के पीछे राजेश और उसके भाई अर्जुन के बीच चल रहा निजी विवाद हो सकता है। बताया गया कि इलाके में रहने वाली एक युवती को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था।

अर्जुन की तलाश में पहुंचे थे आरोपी

जांच में पुलिस को पता चला कि घटना वाले दिन राजेश के तीन साथी बाइक से अर्जुन की तलाश में पहुंचे थे। जब उन्हें अर्जुन झुग्गी में नहीं मिला तो वे वहां से चले गए। कुछ समय बाद आरोपी दोबारा लौटे और कथित तौर पर फायरिंग कर दी।देव ने पुलिस को बताया कि राजेश पहले भी उसे धमकी दे चुका था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले की पूरी साजिश किस तरह तैयार की गई और वारदात में शामिल सभी लोगों की भूमिका क्या थी।

टेक्निकल सर्विलांस से मिला अहम सुराग

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी जानकारी और ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान राजेश की भूमिका सामने आई और उसे कथित तौर पर वारदात का मुख्य साजिशकर्ता माना गया।पुलिस के लिए एक अहम सुराग तब मिला जब जानकारी सामने आई कि राजेश के पुराने हत्या के मामलों में से एक की सुनवाई 31 अगस्त को नोएडा की सेशंस कोर्ट में होनी थी। इसके बाद जांच टीम ने उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी।

एक घंटे तक होटल के बाहर निगरानी, फिर हुई रेड

पुलिस को आरोपियों के बुराड़ी के एक होटल में छिपे होने की जानकारी मिली। टीम ने कार्रवाई से पहले करीब एक घंटे तक होटल के आसपास निगरानी रखी। इसके बाद छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।पुलिस ने राजेश के नाम पर पंजीकृत एक कार भी बरामद की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस वाहन का इस्तेमाल कथित तौर पर वारदात में किया गया था।

निजी विवाद में डराने की साजिश का दावा

पूछताछ के दौरान राजेश ने कथित तौर पर बताया कि अर्जुन और उसके परिवार को डराने के इरादे से फायरिंग की योजना बनाई गई थी। पुलिस का दावा है कि राजेश ने रोहित, नितिन और आशीष के जरिए फायरिंग करवाई थी।इस मामले में आशीष अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर वारदात के पीछे की पूरी कड़ी और हथियारों के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

पुराने आपराधिक रिकॉर्ड ने बढ़ाई चिंता

पुलिस के अनुसार, कथित मास्टरमाइंड राजेश पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हत्या के तीन मामले पहले से दर्ज हैं। अब अशोक विहार फायरिंग मामले में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों और आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट होगी।

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