
नेपाल : तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। आपदा के कई दिन बीतने के बावजूद कई इलाकों में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस प्राकृतिक त्रासदी में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसी सूची में इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लक्स गोपीसेट्टी का नाम भी सामने आया है।
बाढ़ के बाद से CEO से नहीं हो पाया संपर्क
लक्स गोपीसेट्टी नेपाल की यात्रा पर गए थे। 25 अगस्त को बाढ़ की स्थिति बनने के बाद से ही उनका संपर्क नहीं हो पाया है। उनके लापता होने की जानकारी सामने आने के बाद कंपनी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।इंफोसिस की ओर से बताया गया है कि कंपनी की टीम संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है और गोपीसेट्टी की जानकारी जुटाने तथा उनसे संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
परिवार के संपर्क में है कंपनी
इंफोसिस ने कहा है कि वह लक्स गोपीसेट्टी के परिवार के लगातार संपर्क में है और इस मुश्किल समय में परिवार के साथ खड़ी है। कंपनी ने आपदा में प्रभावित सभी लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की है।लक्स गोपीसेट्टी इंफोसिस में ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस एप्लीकेशंस तथा डिजिटल वर्कस्पेस सर्विसेज के प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनका काम सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े संगठनों को रणनीति, तकनीक, संचालन और डिजिटल बदलाव के क्षेत्र में सलाह देना रहा है।
नेपाल और तिब्बत में बढ़ता गया मौतों का आंकड़ा
आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संख्या बढ़कर 586 बताई गई है। करीब 2,500 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें लगभग 320 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की बात भी कही जा रही है।बचाव और राहत अभियान लगातार चलाया जा रहा है। भारत की ओर से भी नेपाल को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा कई अन्य देशों ने भी राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग का हाथ बढ़ाया है।
मलबे और कीचड़ के बीच जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश
बाढ़ से प्रभावित नेपाल के कई इलाकों में तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। नुवाकोट के देवीघाट गांव में जगह-जगह मलबा और कीचड़ जमा है। स्थानीय लोग अपने घरों में बचे सामान को निकालने और नुकसान का जायजा लेने में जुटे हैं।इस बीच राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचने और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की बनी हुई है। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।



















