Meta: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने मेटा समेत अन्य बड़ी टेक कंपनियों को संकेत दिया है कि भारत में काम करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म को अमेरिकी नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि भारतीय कानूनों और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां बनानी होंगी।बुधवार को केंद्र सरकार के अधिकारियों और मेटा प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी, कंटेंट मॉडरेशन और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ डिजिटल कंपनियों की जवाबदेही भी तय है।

डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर सरकार चिंतित

बैठक में इंटरनेट पर बढ़ते डीपफेक कंटेंट और गलत जानकारी के प्रसार को लेकर चिंता जताई गई। सरकार का कहना है कि भारतीय समाज विश्वास और भरोसे की नींव पर चलता है, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।अधिकारियों ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन इसके साथ डिजिटल मंचों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल समाज को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के लिए न हो।

मेटा ने स्वीकार की प्लेटफॉर्म से जुड़ी खामियां

मेटा के फाउंडर मार्क जकरबर्ग ने बुधवार को प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल, डीपफेक सामग्री और कंटेंट नियंत्रण से जुड़ी कमियों को लेकर खेद जताया।कंपनी ने माना कि उसके प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे कंटेंट को बढ़ावा मिला, जो नियमों के खिलाफ थे। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि कुछ मामलों में पैसे लेकर कंटेंट को अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में खामियां रही हैं।

सरकार ने डिजिटल कंपनियों की जवाबदेही पर दिया संदेश

सरकारी सूत्रों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अन्य संस्थाओं की तरह भारतीय समाज और कानून के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करना होगा। सरकार का मानना है कि यह केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है।मेटा अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में कंटेंट की निगरानी, प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

एक्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म भी चर्चा के दायरे में

बैठक के दौरान X और Telegram जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।सरकार ने डिजिटल कंपनियों को यह संदेश दिया कि यदि कोई प्लेटफॉर्म खुद तय करता है कि कौन सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुंचेगा, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ की भूमिका तक सीमित नहीं रह सकते।

भारत में डिजिटल नियमों के पालन पर सरकार का फोकस

केंद्र सरकार का रुख साफ है कि भारत में काम करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों को देश के कानून, नागरिकों की सुरक्षा और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखकर अपनी नीतियां लागू करनी होंगी। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट नियंत्रण को लेकर सरकार की निगरानी और बढ़ सकती है।

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