

नई दिल्ली। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर जमानत मांग रहे आसाराम की मेडिकल जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS के निदेशक को विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है।सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने कहा कि मेडिकल बोर्ड आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर अदालत को सौंपेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी मांगी थी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी
इस मामले में 17 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट की जांच कर यह जानकारी देने को कहा था कि क्या उनकी स्थिति वास्तव में इतनी गंभीर है कि उन्हें इलाज के लिए सीमित समय की अंतरिम जमानत दी जा सकती है।अदालत ने स्पष्ट किया था कि अगर मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर स्वास्थ्य स्थिति सामने आती है तो इलाज के लिए मानवीय आधार पर अंतरिम राहत देने पर विचार किया जा सकता है।
राजस्थान सरकार ने कहा, अभी स्वास्थ्य स्थिति ठीक
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि फिलहाल आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति ठीक है।उन्होंने यह भी बताया था कि करीब तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे, जहां उन्होंने पैदल चलकर दर्शन किए थे। सरकार की ओर से यह दलील आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर रखी गई थी।
गंभीर बीमारी साबित होने पर इलाज के लिए मिल सकती है राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर मेडिकल रिपोर्ट में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या सामने आती है तो अदालत यह नहीं चाहेगी कि किसी व्यक्ति के साथ कोई अप्रिय घटना हो। हालांकि राहत केवल इलाज के उद्देश्य और सीमित अवधि के लिए ही दी जा सकती है।अब एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
2013 के दुष्कर्म मामले में काट रहे हैं आजीवन कारावास की सजा
आसाराम को वर्ष 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अप्रैल 2018 में जोधपुर की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।इसके बाद से आसाराम जेल में बंद हैं। उन्होंने सजा के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे सुनवाई होगी।











