धमतरी: जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। विकासखंड के कई सरकारी प्राथमिक विद्यालय आज भी केवल एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।जानकारी के अनुसार, नगरी विकासखंड में कुल 338 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 48 ऐसे स्कूल हैं, जहां केवल एक शिक्षक पदस्थ है। यही शिक्षक पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

पांच कक्षाएं, अलग-अलग विषय और एक शिक्षक

प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक कक्षा का पाठ्यक्रम और विषय अलग होता है। ऐसे में एक ही शिक्षक के लिए सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को समान रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बेहद कठिन हो जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि एक शिक्षक से पांच अलग-अलग कक्षाओं को प्रभावी ढंग से पढ़ाने की अपेक्षा करना व्यवहारिक नहीं है। इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है और उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।

शिक्षक के अवकाश पर जाते ही ठप हो जाती है पढ़ाई

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब एकमात्र पदस्थ शिक्षक अवकाश पर चले जाते हैं या किसी शासकीय कार्य से बाहर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में विद्यालय पूरी तरह शिक्षक विहीन हो जाता है।ग्रामीणों के मुताबिक, ऐसे दिनों में बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। वे केवल मध्यान्ह भोजन ग्रहण कर घर लौट जाते हैं, जिससे उनकी नियमित शिक्षा बाधित होती है।

ग्रामीणों ने की कम से कम दो शिक्षकों की नियुक्ति की मांग

स्थानीय लोगों ने शासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन प्राथमिक विद्यालयों में केवल एक शिक्षक कार्यरत हैं, वहां तत्काल कम से कम एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाए।ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम दो शिक्षक होने से कक्षाओं का संचालन बेहतर तरीके से हो सकेगा, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और उनके भविष्य को मजबूत आधार मिल सकेगा।

शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्राथमिक स्तर पर मजबूत शैक्षणिक आधार बच्चों के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एकल शिक्षक वाले विद्यालयों की समस्या का शीघ्र समाधान आवश्यक है, ताकि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को भी समान और बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके।

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