

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई. इस याचिका में चुनाव से पहले फ्रीबीज (चुनाव से पहले की जाने वाली मुफ्त योजनाओं की घोषणा) पर रोक लगाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि ऐसे वादे करने वाली राजनीतिक पार्टियों का चुनाव चिह्न जब्त किया जाए या उसका पंजीकरण रद्द किया जाए.
दरअसल जैसे ही चुनाव आते ही राजनीतिक दलों की तरफ से मुफ्त की सुविधाओं के तमाम वादे किए जाते हैं. फ्री बिजली, पानी जैसे कई तरह की घोषणाएं की जाती है. इसे ‘फ्रीबीज’ कहा जाता है. फ्रीबीज पर रोकने लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच के समक्ष मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की. उन्होंने बताया कि उनकी जनहित याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को 2022 में ही नोटिस जारी किए गए थे. उन्होंने कहा कि याचिका पर 5 फरवरी को तत्काल सुनवाई के आग्रह किया गया था. तब कोर्ट ने मार्च में सुनवाई करने पर सहमति जताई थी.
इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब हमारे पास फ़्रीबीज़ पर बात करने के लिए खाली समय होगा तब हम इस पर सुनवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास बहुत काम है. उन्होंने कहा कि यह मामला इंतजार कर सकता है. याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि इस मामले को सुना जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि एक कमेटी बननी है और दोनों पक्ष कमेटी बनाने पर सहमत हो गए हैं, बस आपको मंज़ूरी देनी है. सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने भी उपाध्याय की जल्द सुनवाई की मांग का समर्थन किया.










