दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनावी मुकाबले को लेकर पूरी ताकत झोंक रही हैं। मतदाताओं तक प्रभावी पहुंच बनाने के लिए दोनों दलों ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच सक्रिय रहने हेतु अपने वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। खास तौर पर जातीय समीकरणों को साधने पर दोनों पार्टियों का विशेष फोकस है।

10 प्रभावशाली नेताओं के भरोसे चुनावी रणनीति

उपचुनाव में सामाजिक समीकरण मजबूत करने के उद्देश्य से भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने 10 प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारा है। भाजपा ने ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए ब्राह्मण चेहरे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश महामंत्री शैलेंद्र बरुआ को भी चुनावी जिम्मेदारी दी गई है।

अन्य वर्गों पर भी विशेष नजर

अहिरवार और जाटव समाज के मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने के लिए भाजपा ने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सांसद संध्या राय को जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी का प्रयास है कि हर सामाजिक वर्ग के बीच प्रभावी संवाद स्थापित कर अधिकतम समर्थन हासिल किया जाए।

प्रतिष्ठा की सीट बनी दतिया

दतिया विधानसभा सीट भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश में जुटी है, जबकि भाजपा इसे अपने कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।

हर समीकरण साधने में जुटे राजनीतिक दल

उपचुनाव को देखते हुए दोनों दल संगठनात्मक स्तर पर लगातार बैठकें कर रहे हैं और बूथ स्तर तक रणनीति तैयार की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया में चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प रहने वाला है, जहां स्थानीय मुद्दों के साथ सामाजिक समीकरण भी जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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