

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार 13 जुलाई से शुरू हो रहा है। सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विधानसभा सचिवालय में अब तक कुल 1,033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं, जिनके जरिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सरकार के कामकाज पर जवाब मांगेंगे।
इधर, कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मंगलवार 14 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सरकारी निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इस पर अंतिम सहमति बनी।बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा सत्र की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद विधायक दल की बैठक में विपक्ष की आगामी रणनीति तय की गई।
बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस को मौजूदा सरकार पर भरोसा नहीं है, इसलिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है, प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम जनता विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है।
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि मानसून सत्र के दौरान बिजली संकट, महंगाई, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। इसके अलावा नकटी गांव से जुड़े मामले को भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव लाने के साथ सदन के भीतर और बाहर आंदोलन करने की रणनीति बना रही है।
डॉ. महंत ने कहा कि भले ही विधानसभा सत्र केवल पांच दिनों का है, लेकिन विपक्ष जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।
विधानसभा सचिवालय के अनुसार इस बार कुल 1,033 प्रश्न लगाए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के तहत अधिकतम 20-20 प्रश्न प्रस्तुत किए हैं। खास बात यह है कि प्रश्न पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि अविश्वास प्रस्ताव पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है। प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद सदन में सरकार के कामकाज पर चर्चा होती है और अंत में मतदान के जरिए यह तय किया जाता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास कायम है या नहीं।











