शिकायतकर्ता बोला राजस्व निरीक्षक विजय गुप्ता ने "अगर कलम फंसना है तो जाओ उनका काम करने" बोलकर काम करने से रोका

अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने कलेक्टर-एसडीएम से की कार्रवाई की मांग

बलरामपुर/राजपुर। बलरामपुर जिले के राजपुर के ग्राम नवकी निवासी एक किसान की भूमि का सीमांकन न्यायालयीन आदेश के बावजूद दो वर्ष बाद भी नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष सुदामा राजवाड़े ने जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राजपुर को शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग है।साथ की वीडियो में किसान ने एक राजस्व निरीक्षक पर दूसरे राजस्व निरीक्षक को काम करने से रोकने का आरोप लगाया है।

शिकायत के अनुसार ग्राम नवकी निवासी भगवत पिता चेतन ने अपनी स्वामित्वाधीन भूमि खसरा क्रमांक 394/31, रकबा 0.0710 हेक्टेयर का सीमांकन कराने के लिए 27 दिसंबर 2023 को तहसीलदार न्यायालय, राजपुर में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 129 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था।बताया गया है कि आवेदन पर कार्रवाई करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने पत्र क्रमांक 485 दिनांक 12 अप्रैल 2024 के माध्यम से सीमांकन के लिए जांच दल गठित किया था। इस दल में प्रभारी राजस्व निरीक्षक विजय गुप्ता, प्रभारी राजस्व निरीक्षक पवन पांडे, पटवारी आनंद पांडे, रजाउल हसन सहित अन्य कर्मचारियों को शामिल किया गया था। सीमांकन के दौरान विवाद की आशंका को देखते हुए राजस्व निरीक्षक द्वारा पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था।

इसके बावजूद शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गठित जांच दल आज तक मौके पर पहुंचकर सीमांकन की कार्रवाई पूरी नहीं कर सका। इसके कारण शिकायतकर्ता अपनी भूमि पर खेती नहीं कर पा रहा है तथा कुछ लोगों द्वारा भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किए जाने की बात भी कही गई है। समय पर सीमांकन नहीं होने से भविष्य में भूमि विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

दूसरे हल्के के काम में दखल क्यों? राजस्व निरीक्षक विजय गुप्ता पर गंभीर आरोप, देखे वीडियो:

पीड़ित किसान का आरोप है कि उस दौरान बासेन में पदस्थ राजस्व निरीक्षक विजय गुप्ता ने राजस्व निरीक्षक कार्यालय राजपुर धर्मजीत को यह कहते हुए सीमांकन संबंधी कार्य करने से रोक दिया कि "तुमको अपना कलम फँसाना है तो जाओ।" शिकायत के अनुसार, इस निर्देश के बाद संबंधित भूमि का नक्शा तक तैयार या काटा नहीं गया, जिससे प्रकरण आगे नहीं बढ़ सका।शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विरोधी पक्ष के पास न तो कोई वैध दस्तावेज है और न ही उन्होंने अब तक कोई प्रमाण प्रस्तुत किया है। इसके बावजूद मामले का निराकरण करने के बजाय उन्हें लगातार टालमटोल कर घुमाया जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब उस समय विजय गुप्ता की पदस्थापना बासेन में थी, तो उन्होंने राजपुर में पदस्थ राजस्व निरीक्षक को सीमांकन कार्य करने से रोकने का निर्देश किस अधिकार से दिया? यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह केवल प्रशासनिक हस्तक्षेप का मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का विषय भी बनता है।

जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने अपने आवेदन में कहा है कि वर्ष 2024 से लंबित इस प्रकरण में न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। इससे शिकायतकर्ता एवं उसके परिवार को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने इसे पीड़ित के वैधानिक एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

संगठन ने कलेक्टर एवं एसडीएम से आग्रह किया है कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन कराते हुए पुलिस बल की उपस्थिति में संबंधित भूमि का सीमांकन कराया जाए, ताकि शिकायतकर्ता को उसकी स्वामित्वाधीन भूमि पर विधिसम्मत अधिकार प्राप्त हो सके।साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन पीड़ित परिवार के हित में सक्षम न्यायालय तथा अन्य वैधानिक मंचों का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होगा। शिकायत के साथ न्यायालयीन आदेश, बी-1, खसरा नक्शा एवं ऋण पुस्तिका की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।

न्यायालयीन आदेशों के पालन पर उठे सवा

संगठन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के अंतर्गत पारित सीमांकन आदेशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित कराना संबंधित राजस्व अधिकारियों का वैधानिक दायित्व है। न्यायालय के आदेश के बावजूद वर्षों तक सीमांकन लंबित रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। शिकायत में कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा न्यायालयीन आदेशों की उपेक्षा अथवा लापरवाही की गई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए तथा नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

संगठन ने आरोप लगाया है कि यदि किसी सक्षम न्यायालय के आदेश का बिना उचित कारण लंबे समय तक पालन नहीं किया जाता, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसी आधार पर संगठन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही तहसीलदार न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन कराते हुए पुलिस बल की उपस्थिति में सीमांकन की कार्रवाई पूर्ण कराने का आग्रह भी किया गया है।

जांच अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

शिकायत के संदर्भ में यह भी चर्चा में है कि राजपुर तहसील में सीमांकन एवं अन्य राजस्व प्रकरणों के लंबित रहने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि पटवारियों एवं राजस्व निरीक्षकों के स्तर पर लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कुछ विभागीय सूत्रों का भी दावा है कि कई मामलों में तथ्यों से भिन्न अथवा भ्रमित करने वाले प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेजे जाते हैं, जिससे प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होता है और आवेदकों को समय के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता सक्षम प्राधिकारी की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम में तय है सीमांकन की समय-सीमा

छत्तीसगढ़ शासन के लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत भूमि सीमांकन को समयबद्ध सेवा घोषित किया गया है। अधिनियम के अनुसार खसरा नंबर 59 के अंतर्गत सीमांकन आवेदन पर भौतिक सीमांकन 30 कार्य दिवस के भीतर किया जाना निर्धारित है, जबकि भूमि सीमांकन की पूरी प्रक्रिया अधिकतम 3 माह में पूर्ण की जानी चाहिए। यदि निर्धारित समय-सीमा में सीमांकन नहीं किया जाता है, तो संबंधित आवेदक को प्रथम एवं द्वितीय अपील करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही, बिना उचित कारण सेवा में विलंब होने पर जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।


सीमांकन में देरी पर विधायक ने भी जताई थी नाराजगी

जानकारी के अनुसार हाल ही में क्षेत्रीय विधायक उद्देश्वरी पैंकरा ने भी राजपुर तहसील क्षेत्र में लंबित सीमांकन प्रकरणों को लेकर अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी। बताया जाता है कि तहसील कार्यालय के समीप आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सीमांकन संबंधी मामलों के लंबित होने की शिकायत विधायक से की थी। इसके बाद विधायक ने संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। जांच आदेश का पालन नहीं करने वाले ऐसे अधिकारियों के लेटलतीफी से लगातार मामले लंबित होते रहे हैं।

आखिर जवाबदेही किसकी?

लगातार लंबित सीमांकन प्रकरणों और न्यायालयीन आदेशों के पालन में हो रही देरी के बीच सबसे बड़ा प्रश्न जवाबदेही का है। यदि जांच में यह सामने आता है कि राजस्व निरीक्षकों, पटवारियों अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्रकरण लंबित होते हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाएगी? वहीं यदि देरी के पीछे अन्य प्रशासनिक कारण हैं, तो उनका भी स्पष्ट खुलासा होना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय और राजस्व सेवाएं मिल सकें।


इस सम्बन्ध में राजपुर अनुविगीय अधिकारी (राजस्व) देवेंद्र प्रधान से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाई।

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