

एंबुलेंस की जगह झेलगी का सहारा, दो किमी तक मरीज को लेकर चले ग्रामीण; सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहा भईसापाठ
बलरामपुर/कुसमी। विधानसभा सामरी क्षेत्र के दुर्गम गांवों में विकास और बुनियादी सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सोमवार को सामने आया। कुसमी जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमरपुर के आश्रित ग्राम भईसापाठ में एक बीमार ग्रामीण महिला को इलाज के लिए झेलगी के सहारे करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले जाने की तस्वीर सामने आई है। वीडियो में ग्रामीण पहाड़ी और कच्चे रास्ते से मरीज को झेलगी में लेकर जाते दिखाई दे रहे हैं।
यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है। भईसापाठ की स्थिति इन दावों की जमीनी पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े करती है। सवाल यह भी सामने आ रहें हैं की क्या यहां विधायक, सांसद व अन्य जनप्रतिनिधियों को मात्र चुनाव के समय वोट मांगना ही जिम्मेदारी तय करता हैं और ग्रामीणों को मूल - भुत सुविधाओ से जोड़ना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी नहीं हैं।
सड़क नहीं, मरीज को मुख्य मार्ग तक पहुंचाना भी चुनौती
ग्राम पंचायत अमरपुर के सरपंच महेंद्र पैकरा के अनुसार, यह मामला सोमवार सुबह करीब 8 से 9 बजे की है। मरीज की पहचान रदनी पति लूंदरू, उम्र करीब 50 वर्ष के रूप में बताई गई है। सरपंच के मुताबिक मरीज पिछले करीब एक महीने से इदरीपाठ में झाड़-फूंक के माध्यम से इलाज करा रहा था। सोमवार को उसे इलाज के लिए निजी वाहन किराए पर लेकर झारखंड के महुआडांड़ ले जाया गया।
सरपंच का कहना है कि भईसापाठ तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्ता है। इसी वजह से यहां पक्की सड़क निर्माण में परेशानी आ रही है। पंचायत स्तर से घाट कटिंग का काम कराया जा चुका है, लेकिन घुईझरिया से भईसापाठ तक करीब 7 से 8 किलोमीटर सड़क निर्माण और 73 झरिया में बड़ी पुलिया की जरूरत अब भी बनी हुई है।
कई बार प्रस्ताव, फिर भी सड़क का इंतजार..
सरपंच के मुताबिक भईसापाठ और आसपास के क्षेत्रों में सड़क एवं पुलिया निर्माण की मांग कई बार प्रशासन के समक्ष रखी जा चुकी है। विभिन्न शिविरों में भी ग्रामीणों की ओर से सड़क निर्माण की मांग उठाई गई है और प्रस्ताव दिए गए हैं। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत छोटी होने के कारण पंचायत को मिलने वाला बजट सीमित है, जिससे इतने बड़े सड़क एवं पुलिया निर्माण का काम पंचायत स्तर पर कराना संभव नहीं है। ऐसे में उच्च स्तर से सड़क निर्माण की स्वीकृति और राशि की आवश्यकता है।
30 की आबादी, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार..
सरपंच के अनुसार भईसापाठ में करीब 8 परिवार और लगभग 30 लोग निवास करते हैं। गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। ग्रामीण ढोड़ी के पानी पर निर्भर हैं।
शिक्षा के लिए भी ग्रामीण बच्चों को करीब 3 किलोमीटर दूर घुईझरिया स्थित आंगनबाड़ी जाना पड़ता है, जबकि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर भूलसी खुर्द जाना पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधा की बात करें तो ग्रामीणों को इलाज के लिए करीब 8 किलोमीटर दूर भूलसी कला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। ऐसे में बरसात या आपात स्थिति में मरीज को गांव से बाहर निकालना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
प्रशासन ने लिया संज्ञान, मौके पर जाने की बात
मामले में जनपद पंचायत कुसमी के नवपदस्थ प्रभारी सीईओ मुन्नालाल धुर्वे ने कहा कि उन्हें पदभार ग्रहण किए अभी कुछ ही सप्ताह हुए हैं। सोमवार को टीएल बैठक के कारण वे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं ले सके। उन्होंने कहा कि संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच से मामले की जानकारी ली जाएगी। साथ ही **मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का निरीक्षण करने के बाद सड़क निर्माण के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों की पहुंच पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों और पंचायत स्तर से मिली जानकारी के अनुसार भईसापाठ जैसे दुर्गम गांव में अब तक सड़क, पुलिया, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। सरपंच का दावा है कि ग्रामीणों की ओर से इन समस्याओं को लेकर कई बार मांग रखी गई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि दुर्गम और कम आबादी वाले गांवों तक सरकारी योजनाओं और जनप्रतिनिधियों की नियमित पहुंच किस तरह सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए अब भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
सवाल सिर्फ एक मरीज का नहीं, पूरी व्यवस्था का है
भईसापाठ में मरीज को झेलगी के सहारे पैदल ले जाने की तस्वीर को केवल एक घटना के तौर पर देखने के बजाय दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के संदर्भ में देखना होगा। अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र की दूरी के साथ वहां तक पहुंचने का रास्ता भी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसी आपात स्थिति में मरीज को पहले पैदल मुख्य मार्ग तक लाना पड़े और उसके बाद वाहन की व्यवस्था करनी पड़े, तो उपचार में होने वाली देरी गंभीर समस्या बन सकती है।
अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल इस घटना की जानकारी लेने की नहीं, बल्कि भईसापाठ की सड़क, पुलिया, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का स्थल निरीक्षण कर स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार करने की है।
सीएम साहब, सवाल यही है
सामरी विधानसभा के भईसापाठ जैसे गांव में यदि एक मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को झेलगी के सहारे दो किलोमीटर पैदल चलना पड़े, पीने के लिए ढोड़ी का पानी और पढ़ाई के लिए बच्चों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़े—तो विकास की योजनाओं की वास्तविक पहुंच इन गांवों तक कब और कैसे पहुंचेगी।











