शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लखनपुर में वर्षों से बनी हुई है शिक्षकों की कमी, छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित, अतिथि शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की मांग तेज

लखनपुर/प्रिंस सोनी: शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति का आधार होती है। विद्यालय केवल भवन और संसाधनों का नाम नहीं है, बल्कि वहां उपलब्ध शिक्षकों की गुणवत्ता और संख्या ही शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक पहचान होती है। जब किसी विद्यालय में सैकड़ों छात्राएं अध्ययन कर रही हों, हर वर्ष प्रवेश के लिए अभिभावकों की लंबी कतारें लगती हों, विद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा हो और वहां से पढ़कर निकली छात्राएं प्रशासन, शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुकी हों, तब यह स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि ऐसे संस्थान में शिक्षकों की कोई कमी नहीं होगी।

लेकिन सरगुजा जिले के नगर पंचायत लखनपुर स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लखनपुर की वर्तमान स्थिति इस उम्मीद के बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। वर्ष 1978 से संचालित यह विद्यालय पिछले लगभग 48 वर्षों से क्षेत्र में कन्या शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन आज भी यहां कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है, फिर भी राजनीति विज्ञान, संस्कृत और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए नियमित शिक्षक नहीं होने से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि सैकड़ों छात्राओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।

क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित कन्या विद्यालय

लखनपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की विशेष पहचान है। यह विद्यालय वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों के लिए जाना जाता रहा है।नगर क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के दर्जनों गांवों की छात्राएं भी यहां अध्ययन करने आती हैं। विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं की संख्या सामान्यतः 500 से 800 के बीच रहती है। हर वर्ष प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बेटियों का नामांकन यहां कराने के लिए प्रयास करते हैं।

विद्यालय के पूर्व छात्राओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कई छात्राएं डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी तथा अन्य प्रतिष्ठित पदों तक पहुंच चुकी हैं। यही कारण है कि यह विद्यालय आज भी क्षेत्र की बेटियों के लिए सबसे भरोसेमंद शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है।

नया सत्र शुरू, लेकिन शिक्षक नहीं

राज्य शासन द्वारा 16 जून 2026 से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ कर दिया गया। प्रदेश के अधिकांश विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन लखनपुर के इस प्रतिष्ठित कन्या विद्यालय में छात्राओं को पहले ही दिन से शिक्षक संकट का सामना करना पड़ रहा है।विद्यालय में राजनीति विज्ञान, संस्कृत और गणित विषयों के नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इन विषयों की कक्षाएं या तो प्रभावित हो रही हैं अथवा अन्य शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर किसी प्रकार शैक्षणिक कार्य चलाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गणित जैसे विषय में प्रारंभिक अवधारणाएं और नियमित अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि समय पर विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे तो छात्राओं की बुनियादी समझ कमजोर हो सकती है। इसी प्रकार राजनीति विज्ञान और संस्कृत विषयों में भी विशेषज्ञ शिक्षकों की आवश्यकता अनिवार्य मानी जाती है।

विद्यालय की छात्राओं का कहना है कि नए सत्र की शुरुआत में ही पढ़ाई बाधित होना उनके लिए चिंता का विषय है। कई छात्राएं बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं और उन्हें समय पर विषय विशेषज्ञ मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

युक्तियुक्तकरण के बावजूद क्यों नहीं मिली राहत?

पिछले वर्ष राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण अभियान चलाया गया था। इसका उद्देश्य था कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या अधिक है वहां से उन्हें उन विद्यालयों में भेजा जाए जहां शिक्षकों की कमी है।शिक्षा विभाग ने इस अभियान को शिक्षा व्यवस्था में सुधार का महत्वपूर्ण कदम बताया था। उम्मीद थी कि इससे शिक्षक विहीन विद्यालयों को राहत मिलेगी और विद्यार्थियों को पर्याप्त शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी।लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लखनपुर को इस अभियान का अपेक्षित लाभ नहीं मिला। आज भी यहां कई विषय शिक्षक विहीन हैं।लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शिक्षकों का संतुलित वितरण था, तो फिर क्षेत्र के सबसे बड़े कन्या विद्यालय को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छात्राओं की बड़ी संख्या और विद्यालय की प्रतिष्ठा को देखते हुए यहां विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।अंग्रेजी विषय में भी 1 शिक्षक है बच्चों का स्टेल्थ जायदा है जिसे अतिरिक्त अतिथि शिक्षक English विषय की जरूरत

स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि विद्यालय में अंग्रेजी विषय के लिए अपेक्षाकृत पर्याप्त व्यवस्था है। यदि वहां एक शिक्षक कम भी होता और उसके स्थान पर गणित, संस्कृत या राजनीति विज्ञान जैसे विषयों के लिए अतिथि शिक्षक नियुक्त कर दिया जाता तो छात्राओं को अधिक लाभ मिल सकता था।उनका मानना है कि विद्यालयों में शिक्षक पदस्थापना छात्र संख्या और विषयगत आवश्यकता के आधार पर होनी चाहिए, ताकि सभी विषयों में संतुलित शैक्षणिक वातावरण तैयार हो सके।

एक शिक्षक पर कई विषयों का बोझ

विद्यालय में शिक्षकों की कमी का सीधा असर कार्यरत शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। कई शिक्षकों को अपनी विशेषज्ञता के अलावा अन्य विषयों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है।स्थिति यह है कि कुछ शिक्षकों को दो-दो और तीन-तीन विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। इससे शिक्षकों का कार्यभार बढ़ता है और विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी शिक्षक को लंबे समय तक उसकी विशेषज्ञता से अलग विषय पढ़ाने की व्यवस्था उचित नहीं मानी जा सकती। इससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता दबाव

शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान समय में केवल पढ़ाई ही उनकी जिम्मेदारी नहीं रह गई है। उन्हें आधार अपडेट, अपार आईडी निर्माण, ऑनलाइन डेटा एंट्री, विभिन्न सर्वेक्षण, निर्वाचन कार्य, विभागीय रिपोर्ट तैयार करने तथा अन्य प्रशासनिक गतिविधियों में भी समय देना पड़ता है।इन कार्यों के कारण शिक्षकों का काफी समय विद्यालयी शिक्षण से हटकर अन्य गतिविधियों में व्यतीत हो जाता है।यदि विद्यालय में पहले से ही शिक्षकों की कमी हो और उपलब्ध शिक्षकों को भी अनेक गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना पड़े, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है।
शिक्षकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान उन्हें अधिकतम समय शिक्षण कार्य के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

चौकीदार, भृत्य और लिपिक के पद भी रिक्त

विद्यालय की समस्या केवल शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। यहां चौकीदार, भृत्य तथा दो लिपिक पद भी लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं।कन्या विद्यालय होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से चौकीदार का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विद्यालय परिसर की सुरक्षा, छात्राओं की सुरक्षा तथा रात्रिकालीन निगरानी के लिए चौकीदार की आवश्यकता अनिवार्य है।इसी प्रकार भृत्य के अभाव में विद्यालय के कई छोटे-बड़े व्यवस्थागत कार्य प्रभावित होते हैं। कई बार शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को भी ऐसे कार्यों में समय देना पड़ता है जो उनके मूल दायित्वों का हिस्सा नहीं हैं।वहीं दो लिपिक पद रिक्त होने से कार्यालयीन कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। छात्रवृत्ति, दस्तावेजीकरण, पत्राचार, परीक्षा संबंधी अभिलेख तथा विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित विद्यालय में इन महत्वपूर्ण पदों का वर्षों तक रिक्त रहना चिंता का विषय है।

छात्राओं में बढ़ रही चिंता

विद्यालय की छात्राओं का कहना है कि कक्षा 11वीं और 12वीं में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का महत्व और भी बढ़ जाता है। बोर्ड परीक्षाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नियमित मार्गदर्शन आवश्यक होता है।यदि सत्र के प्रारंभिक महीनों में ही पढ़ाई प्रभावित होगी तो उसका असर पूरे वर्ष की तैयारी पर पड़ेगा।छात्राओं का कहना है कि वे नियमित रूप से विद्यालय आती हैं और पूरी लगन से पढ़ाई करना चाहती हैं, लेकिन शिक्षक नहीं होने से कई बार निराशा होती है।उनका मानना है कि यदि समय रहते विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध करा दिए जाएं तो पढ़ाई व्यवस्थित रूप से संचालित हो सकेगी और परीक्षा परिणाम भी बेहतर होंगे।

अभिभावकों में बढ़ रही नाराजगी

अभिभावकों का कहना है कि वे अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से इस विद्यालय में भेजते हैं। विद्यालय की प्रतिष्ठा और वर्षों पुराने शैक्षणिक इतिहास को देखते हुए उन्हें यहां से बड़ी उम्मीदें रहती हैं।लेकिन लगातार बनी हुई शिक्षक कमी के कारण अभिभावकों में चिंता और नाराजगी बढ़ रही है।उनका कहना है कि जब छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है तो उसी अनुपात में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।कई अभिभावकों ने जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

तत्काल अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की मांग

स्थानीय नागरिकों, शिक्षा प्रेमियों और अभिभावकों का मानना है कि नियमित भर्ती प्रक्रिया में समय लग सकता है।
ऐसी स्थिति में राजनीति विज्ञान, संस्कृत और गणित विषयों के लिए तत्काल अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।उनका कहना है कि अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था होने से विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी और छात्राओं को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग मिल सकेगा।

शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जब तक स्थायी नियुक्ति नहीं होती, तब तक अतिथि शिक्षक व्यवस्था सबसे व्यावहारिक समाधान हो सकती है।

प्रशासन और शासन से बड़ी अपेक्षाएं

क्षेत्रवासियों की मांग है कि जिला शिक्षा अधिकारी, कलेक्टर सरगुजा तथा राज्य शासन इस गंभीर विषय पर तत्काल ध्यान दें।विद्यालय में रिक्त शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय पदों की समीक्षा कर शीघ्र आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही छात्र संख्या के अनुरूप नया स्टाफ पैटर्न तैयार किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

लोगों का कहना है कि कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने की बात केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।

भविष्य से जुड़ा सवाल

शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लखनपुर केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीदों का केंद्र है। यहां पढ़ने वाली छात्राएं आने वाले समय में समाज, प्रशासन, शिक्षा और देश निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।ऐसे में राजनीति विज्ञान, संस्कृत और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की कमी तथा चौकीदार, भृत्य और लिपिक जैसे आवश्यक पदों का रिक्त रहना चिंता का विषय है।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर छात्राओं की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा।अब सबकी निगाहें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि छात्राओं के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालय में आवश्यक शिक्षकों और कर्मचारियों की शीघ्र व्यवस्था की जाएगी, ताकि 48 वर्षों से शिक्षा का उजाला फैलाने वाला यह प्रतिष्ठित कन्या विद्यालय अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे भी बनाए रख सके।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

इस संबंध में  कैबिनेट मंत्री  राजेश अग्रवाल  ने कहा कि राज्य सरकार लगातार शिक्षक भर्ती कर रही है। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां तत्काल व्यवस्था की जा रही है, ताकि सभी विद्यालयों में शिक्षण कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके।


संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संजय गुप्ता

संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा संभाग संजय गुप्ता ने बताया कि गवर्मेंट गर्लस हायर सेकेंडरी स्कूल लखनपुर में शिक्षक, लिपिक एवं भृत्य (प्यून) के रिक्त पदों की जानकारी  मुझे नहीं है  यदि  ऐसा है तो  प्राचार्य से जानकारी प्राप्त करने के बाद आवश्यकता होने पर आसपास के विद्यालयों से शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी।

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