

नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में प्रशासनिक उदासीनता के विरोध का एक अनोखा मामला सामने आया है। शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज एक ग्रामीण गले में जूतों की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंच गया। उसका यह विरोध प्रदर्शन देखते ही कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोग हैरान रह गए और मामला चर्चा का विषय बन गया।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप
पूरा मामला नीमच जिले के ग्राम सावन का है। गांव निवासी जीतराम का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा कर उसका उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने शिकायत में राहुल गुर्जर पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है।
जीतराम का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
न्याय नहीं मिला तो अपनाया अनोखा तरीका
ग्रामीण का आरोप है कि हर बार अधिकारियों से केवल आश्वासन मिला, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। लगातार अनदेखी से परेशान होकर उसने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए गले में जूतों की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंचने का फैसला किया।
उसका कहना है कि जब सामान्य शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई, तब मजबूरी में उसे इस तरह विरोध दर्ज कराना पड़ा।
ग्रामीणों ने रखीं कई महत्वपूर्ण मांगें
जनसुनवाई के दौरान सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने शासकीय भूमि की तत्काल राजस्व सर्वेक्षण और नाप-जोख कराने की मांग की। उनका कहना है कि इससे जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए और भूमि को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
कलेक्ट्रेट परिसर में बना चर्चा का विषय
जनसुनवाई में जूतों की माला पहनकर पहुंचे ग्रामीण का विरोध प्रदर्शन पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चा का केंद्र बना रहा। वहां मौजूद लोग इस अनोखे तरीके को देखकर हैरान नजर आए।
प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीण का ज्ञापन स्वीकार किया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में शिकायत निवारण व्यवस्था
यह घटना एक बार फिर स्थानीय स्तर पर शिकायतों के निस्तारण और प्रशासनिक कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को कब तक राहत मिलती है।





















