

इंदौर : सामने आए वंदे मातरम गान विवाद में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को बड़ा कानूनी झटका लगा है। जिला अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है और अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
मामला कैसे पहुंचा अदालत तक
एमजी रोड थाना पुलिस ने वंदे मातरम को लेकर हुए विवाद के बाद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। आरोपों के बाद दोनों पक्षों के बीच मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंच गया और अग्रिम जमानत को लेकर अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
कोर्ट में रखे गए तर्क और दलीलें
फौजिया शेख अलीम की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह पिछले दो दशकों से इंदौर में पार्षद के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी से जुड़ी हैं और वर्तमान में एलएलबी की छात्रा भी हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि उनकी परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए।
अभियोजन पक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति
सुनवाई के दौरान शासकीय लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौड़ ने जमानत याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि वंदे मातरम को लेकर दिए गए कथित बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले हैं और इससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ा है। अदालत को यह भी बताया गया कि इन बयानों के चलते विभिन्न वर्गों में विवाद की स्थिति बनी।अभियोजन ने यह भी कहा कि दर्ज प्रकरण गंभीर प्रकृति का है और इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने की मांग की गई।
अदालत का फैसला और आगे की स्थिति
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला अदालत ने फौजिया शेख अलीम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है। कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस पार्षद की कानूनी मुश्किलें और बढ़ती दिखाई दे रही हैं।





















