

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। अब द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी संसद तक पहुंच गई है। Kanimozhi Karunanidhi ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर DMK सांसदों के लिए सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।इस कदम को विपक्षी राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के साथ बैठना अब उचित नहीं: कनिमोझी
अपने पत्र में कनिमोझी ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस के साथ गठबंधन समाप्त होने के बाद DMK सांसदों का कांग्रेस सदस्यों के साथ बैठना उचित नहीं माना जा सकता।उन्होंने स्पीकर से अनुरोध किया कि DMK संसदीय दल के लिए अलग सीटिंग अरेंजमेंट किया जाए ताकि पार्टी सांसद सदन में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकें।
स्पीकर कार्यालय ने शुरू किया विचार
सूत्रों के मुताबिक लोकसभा स्पीकर कार्यालय ने इस पत्र पर विचार प्रक्रिया शुरू कर दी है। संसद में सीटिंग व्यवस्था संसदीय परंपराओं और दलों की स्थिति के आधार पर तय की जाती है। अंतिम फैसला स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है।
लंबे समय से साथ रहे हैं DMK और कांग्रेस
Dravida Munnetra Kazhagam और Indian National Congress लंबे समय से सहयोगी दल रहे हैं। दोनों पार्टियों ने कई चुनावों में साथ मिलकर मुकाबला किया है।हालांकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों दलों के रिश्तों में तनाव की चर्चाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में संसद में अलग बैठने की मांग को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
नई रणनीति की ओर बढ़ रही DMK?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि DMK का यह कदम पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इससे आने वाले संसद सत्र और भविष्य के विपक्षी गठबंधनों को लेकर नई अटकलें भी तेज हो गई हैं।अब सभी की नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि यह फैसला विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर अहम संकेत दे सकता है।





















