

अंबिकापुर: अंबिकापुर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां एक कथित अवैध स्कूल द्वारा भारी-भरकम फीस वसूली और नियमों की अनदेखी का मामला उजागर हुआ है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विष्णु सिंह देव ने इस पूरे मामले को “भाषा के नाम पर भेदभाव और संगठित अपराध” करार देते हुए प्रशासन और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल आरोप है कि शहर के बीचों-बीच स्थित यह स्कूल वर्षों से बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहा है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जानकारी के अनुसार, स्कूल में प्रति छात्र सालाना करीब 1 लाख तक की फीस ली जा रही है, जिसमें ट्यूशन फीस के अलावा किताब, कॉपी, ड्रेस, बैग और अन्य सामग्री शामिल है। लगभग 200 छात्रों के आधार पर यह आंकड़ा हर साल करीब 2 करोड़ तक पहुंचता है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी रकम की वसूली के बावजूद अब तक केवल ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया, जिसे लोगों ने “न्याय का मज़ाक” बताया है। विष्णु सिंह देव ने कहा कि यदि स्कूल अवैध है, तो पिछले तीन वर्षों में वसूली गई पूरी फीस पालकों को वापस कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा, स्कूल पर बिना फूड विभाग की अनुमति के बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का भी आरोप है, जो नियमों का उल्लंघन है। इस मामले में स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सरगुजा की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मामले को लेकर संबंधित थाना में FIR दर्ज करने हेतु आवेदन दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो पीड़ित पक्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली, फीस संरचना और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पालकों में भय और असंतोष का माहौल है, वहीं शिक्षा के नाम पर हो रही कथित लूट के खिलाफ आवाज़ उठने लगी है।
































