मध्य प्रदेश : रीवा और मऊगंज जिलों में सड़क निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में सामने आया है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी को अंजाम दिया।

घटिया सामग्री और फर्जी बिलिंग का खुलासा

जांच में पाया गया कि निर्माण कार्यों में निम्न स्तर का डामर उपयोग किया गया, जबकि दस्तावेजों में उच्च गुणवत्ता का उल्लेख कर Indian Oil Corporation Limited के नाम से फर्जी बिल तैयार किए गए।
इस तरीके से रीवा में करीब 12.71 करोड़ और मऊगंज में 5.88 करोड़ रुपये की राशि निकाली गई। कुल मिलाकर यह घोटाला 18 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है।

चार वर्षों तक चलता रहा खेल

यह पूरा फर्जीवाड़ा वर्ष 2017 से 2021 के बीच लगातार जारी रहा। जांच में सामने आया कि फर्जी इनवॉइस और कागजी दस्तावेजों के सहारे सड़कों को मजबूत दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया।

44 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज

EOW ने इस मामले में कुल 44 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

  • रीवा से 27 आरोपी
  • मऊगंज से 17 आरोपी

इनमें विभाग के पूर्व महाप्रबंधक, सहायक प्रबंधक, उपयंत्री और कई ठेकेदार शामिल हैं। सभी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की गई है।

प्रशासनिक तंत्र में मचा हड़कंप

घोटाले के उजागर होते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब यह देखने वाली बात होगी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाता है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!